सात महीने से 34 गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर बैन, अपनी ही जमीन की बिक्री नहीं कर पा रहे

रायपुर से सारंगढ़ खंड तक 51.900 किमी की नई सड़क बनाई जा रही है। इसके लिए रायपुर जिले की तीन तहसीलों के 34 गांवों की जमीनों की खरीदी-बिक्री पर बैन लगा दिया गया है। जमीन मुआवजा तय करने रायपुर कलेक्टर ने इन गांवों की जमीन की खरीदी-बिक्री पर जुलाई 2025 को प्रतिबंध लगाया था। लेकिन अभी तक जिनकी वहां रहने वाले लोगों को और किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। लोगों को उनकी जमीन का मुआवजा तक नहीं मिला है। ऐसे में लोग अपनी जरूरतों के समय भी अपनी ही जमीन को नहीं बेच पा रहे हैं। इतना ही नहीं मुआवजा नहीं मिलने की वजह से लोगों के कई तरह के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार 34 गांवों के सैकड़ों लोगों की जमीन इस सड़क पर आ रही है। केंद्रीय जहाजरानी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इस सड़क का निर्माण किया जा रहा है। बैन नहीं हटने की वजह से लोग अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेज पा रहे हैं, लड़कियों की शादियां टल रही है, नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं लोग बाहर रहने के लिए नया घर भी नहीं बना पा रहे हैं। इस वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इस वजह से इन गांवों के लोगों ने राजस्व मंत्री और धरसींवा विधायक से भी प्रतिबंध हटाने की मांग की है।
जरूरत है तो नहीं बेच पा रहे
बरौंडा में रहने वाले जगन्नाथ वर्मा ने बताया कि उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए जमीन की बिक्री करनी थी, लेकिन प्रशासन की रोक की वजह से वे अपनी ही जमीन बेच नहीं पा रहे हैं। इससे उन्हें खासी परेशानी हो रही है। नया प्रोजेक्ट शुरू करना था
टेकारी में रहने वाले विजय मित्तल की जमीन पर भी प्रशासन की रोक लग गई है। उन्हें अपने एक नए प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए जमीन की बिक्री करनी थी, लेकिन वे अभी तक नहीं कर पा रहे हैं। उनका प्रोजेक्ट भी शुरू नहीं हो पा रहा। बच्चों के कई काम रूके
रिंग रोड थ्री में रहने वाले पवन टाटिया, अशोक सिन्हा की जमीन भी इसी प्रोजेक्ट में आ रही है। उन्हें जमीन बेचकर घर के बच्चों के लिए कई काम करने हैं, लेकिन वे महीनों से अपनी ही जमीन नहीं बेच पा रहे हैं। इन गांवों की जमीन पर लगी रोक, फोरलेन सड़क बनेगी
केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130 बी (रायपुर से सारंगढ़) को चौड़ीकरण करने के साथ ही फोर लेन किया जाना है। इसके लिए तीन तहसीलों की जमीन ली जानी है है। इसलिए कलेक्टर ने धरसींवा के निमोरा-1, घनेली-1, रांवाभाठा, सिलतरा, गिरौद, टेकारी, परसुलीडीह, बड़ौदा, दोंदेखुर्द, दोंदेकला, मटिया, जरौदा, निलजा, सारागांव, रायपुर तहसील में आमासिवनी, मंदिरहसौद तहसील में सेमरिया-2, नरदहा, खरोरा तहसील में बरौंदा, कुर्रा, बंगोली, मुर्रा, नारधा, माठ, खरोरा, बुडेरा, केवराडीह, केसला सिर्री, कनकी, पाड़ाभाठ, खपरीडीह और आरंग तहसील में भैंसा, भठिया, खोरसी, खैरा गांव की जमीन की खरीदी-बिक्री, डायवर्सन बटांकन आदि काम पर प्रतिबंध लगाया है। प्रतिबंध का आदेश 16 जुलाई 2025 को जारी किया गया था। जमीनों की कारोबार पर बैन लगाने के बाद से ही अब तक इस पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है। भारतमाला मुआवजा घोटाला के बाद से ही मामला थमा
नई सड़क बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला बेहद धीमा चल रहा है। अफसरों की लापरवाही की वजह से अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि कितने लोगों को कितना मुआवजा देना है। मुआवजे की अंतिम रकम और लोगों की सूची भी नहीं बन पाई है। मुआवजा देने पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही केंद्र सरकार संबंधित तहसीलों के एसडीएम के पास मुआवजे की रकम जमा कराती है। इसके बाद ही प्रभावित लोगों को मुआवजे की रकम का चेक दिया जाता है। लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ भी नहीं होने पर धरसींवा, मंदिरहसौद और रायपुर तहसील के तहसीलदारों ने भी चुप्पी साध ली है। उनका कहना है कि मामला उच्च स्तर का है। ऐसे में वे इस बारे में ज्यादा नहीं बता सकते। अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, इसलिए रोक
अभी अधिग्रहण और मुआवजा संबंधित काम जारी है। इसलिए अभी फिलहाल रोक है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क है। प्रक्रिया जारी है। -नंद कुमार चौबे, एसडीएम रायपुर

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