15 लाख दुर्लभ पांडुलिपियों का करेंगे संरक्षण:ग्रंथों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया जाएगा डिजिटल रिकॉर्ड

सीकर रोड स्थित भवानी शिक्षा निकेतन में अखिल भारतीय मठ-पीठाधीश्वर समागम एवं शास्त्र संरक्षण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में करीब 15 लाख दुर्लभ पांडुलिपियों और ग्रंथों को सुरक्षित रखने और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए 215 पांडुलिपि धारकों और चार संस्थाओं के 60 केंद्र ज्ञान भारतम् मिशन से जुड़े। कार्यक्रम श्रीमद्जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य महाप्रभु के 825वें प्राकट्य उत्सव पर हो रहे नौ दिवसीय 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के अवसर पर रखा गया, जिसमें संत-महात्माओं, आचार्यों और विद्वानों की मौजूदगी रही। शास्त्रों को बचाना ही संस्कृति की रक्षा मंच पर स्वामी राजेन्द्रदास देवाचार्य, जगद्गुरु स्वामी रामकृष्णाचार्य, महामंडलेश्वर डॉ. गणेशदास, महंत वैष्णव हरिशंकर दास, स्वामी अवतार पुरी, स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी और पं. महेश दत्त शर्मा सहित संत मौजूद रहे। इस मौके पर स्वामी राजेन्द्रदास देवाचार्य ने बताया कि भारतीय संस्कृति की जड़ हमारे शास्त्र हैं और उन्हें सुरक्षित रखना राष्ट्र की आत्मा की रक्षा है। उन्होंने बताया कि रैवासा धाम के माध्यम से संत साहित्य को भारत सरकार के साथ मिलकर सुरक्षित रखा जाएगा। अध्यक्षता कर रहे स्वामी रामकृष्णाचार्य ने बताया कि यह पहल सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। ग्रंथों का विमोचन भी हुआ कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई। स्वागत भाषण प्रो. सोमदेव शास्त्री ने दिया। समारोह के दौरान ‘श्रीराम परत्वम्’ और ‘श्री दादूदर्शन भारतीय लिपि के इतिहास’ ग्रंथों का विमोचन किया गया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक के शंकराचार्य, पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर और महंतों की मौजूदगी रही। अंत में शास्त्र संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

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