प्रतापगढ़ जिला प्रशासन ने नगर परिषद क्षेत्र में पिछले पांच सालों के भूमि आवंटन, पट्टा वितरण और भू-उपयोग परिवर्तन मामलों की जांच के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच जारी सभी संबंधित प्रकरणों की जांच हेतु एक 5 सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया है। जांच के दायरे में कुल 2342 पंजीकृत दस्तावेज इस जांच के दायरे में कुल 2342 पंजीकृत दस्तावेज शामिल किए गए हैं। इनमें उप पंजीयक प्रतापगढ़ कार्यालय में दर्ज 1787 दस्तावेज और उप पंजीयक देवगढ़ में दर्ज 555 दस्तावेज शामिल हैं। ये सभी मामले भू-खण्ड पट्टों, खांचा भूमि आवंटन, नीलामी तथा आवासीय एवं व्यावसायिक कॉलोनियों के भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित हैं। कमेटी में कई अधिकारी शामिल गठित कमेटी में प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हैं। इसमें सहायक प्रशासनिक अधिकारी महावीर कुमार यादव (अध्यक्ष), सहायक प्रशासनिक अधिकारी गजेंद्र डूंगरवाल (सदस्य), भू-अभिलेख निरीक्षक विजेंद्र (सदस्य), सहायक प्रोग्रामर ईश्वर ग्वाला (सदस्य) और वरिष्ठ सहायक प्रकाश चंद्र धाकड़ (सदस्य सचिव) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमेटी को नगर परिषद प्रतापगढ़ क्षेत्र के साथ-साथ प्रतापगढ़, हाट सालमगढ़, बगवास, मानपुरा (उर्फ कथागरा), मालीखेड़ा (उर्फ रघुनाथपुरा) सहित आसपास के राजस्व गांवों में विकसित कॉलोनियों और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान विशेष रूप से उन अनियमितताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें नगर परिषद रिकॉर्ड से बाहर हुए पंजीकरण, कार्यकारी सभापति के हस्ताक्षर से जारी संदिग्ध पट्टे, धारा 69 (क) और नियम 22 के उल्लंघन, तथा फ्री-होल्ड पट्टा विलेख और भू-उपयोग परिवर्तन में गड़बड़ी जैसे मामले सामने आए हैं।


