रायपुर में बुजुर्ग से 5 लाख की साइबर ठगी:’सीनियर सिटीजन कार्ड’ बनाने का दिया झांसा, एपीके फाइल डाउनलोड करवाई; वीडियो कॉल करके अकाउंट से तीन किश्तों में पैसे निकाले

छत्तीसगढ़ की राजधानी में साइबर ठगों ने अब बुजुर्गों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ठगों ने कोतवाली थाना क्षेत्र में बुजुर्ग को ‘सीनियर सिटीजन कार्ड’ बनवाने का झांसा दिया और 5 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने पीड़ित किसान को एपीके फाइल डाउनलोड करवाई और किश्तों में अकाउंट से पैसे निकाल लिए। पीड़ित का नाम पुलिस द्वारा गुलाम कादर खान बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले में जांच शुरु कर दी है। अब पढ़े क्या है पूरा मामला कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले गुलाम कादर खान के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉलर ने खुद को सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हुए ‘सीनियर सिटीजन कार्ड’ के फायदे गिनाए। ठग ने पीड़ित को विश्वास में लेकर व्हाट्सएप पर एक APK फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने को कहा। जैसे ही गुलाम कादर खान ने वह फाइल ओपन की, उनका मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के कंट्रोल में चला गया। वीडियो कॉल पर एटीएम कार्ड देखा आरोपियों ने शातिर ठगों ने केवल फाइल से संतोष नहीं किया। उन्होंने बुजुर्ग को वीडियो कॉल किया और कार्ड वेरिफिकेशन के नाम पर उनका एटीएम (ATM) कार्ड और आधार कार्ड कैमरे के सामने दिखाने को कहा। इस दौरान ठगों ने स्क्रीन शेयरिंग या कैमरे के जरिए कार्ड की गोपनीय जानकारी और सीवीवी (CVV) नंबर हासिल कर लिया। तीन किस्तों में उड़ाए 4.99 लाख रुपए पुलिस के अनुसार ठगों ने पीड़ित के अकाउंट से तीन किश्तों में 4,99,751 रुपए की चपत लगाई गई। जब तक बुजुर्ग कुछ समझ पाते, खाता लगभग खाली हो चुका था। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करके जांच शुरु कर दी है। कोतवाली के अलावा साइबर सेल की टीम भी मामले में अलग से जांच कर रही है।
जानिए क्या होती है APK फाइल, कैसे होता है फ्रॉड APK एक फाइल फॉर्मेट है। इसका इस्तेमाल एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) पर ऐप्लिकेशन को इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। APK फाइल में ऐप्लिकेशन के लिए जरूरी सभी डेटा होता है, जिसमें सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के कोड और अन्य संसाधन शामिल है। ठग इसमें साफ्टवेयर बाइंड करके यूजर्स का अकाउंट खाली करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल फोन पर भी इस फाइल के डाउनलोड होने के बाद कोई आइकन नहीं दिखता, जिससे इसको अन-इंस्टॉल किया जा सके। एक बार आपने लिंक पर क्लिक किया तो फोन में इसकी डाउनलोडिंग शुरू हो जाती है। डाउनलोड होने पर मोबाइल फोन हैक होना शुरू कर देता है। इसके बाद अन्य लोगों को भी डाउनलोड कराने का मैसेज वॉट्सऐप पर भेजना शुरू कर देते हैं। साइबर क्राइम होने पर शिकायत कहां करें? कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि अगर आपको ऐसा ही कोई कॉल या मैसेज आता है, जिसमें डरा-धमकाकर पैसे की मांग की जाती है तो इसकी नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत जरूर करें। सरकार ने साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट पर ‘चक्षु पोर्टल’ लॉन्च किया है। इसके अलावा http://www.cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज कराने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध वाणी चैट बोट की मदद ले सकते हैं। साइबर फाइनेंशियल क्राइम हेल्पलाइन नंबर 155260 के जरिए भी शिकायत कर सकते हैं।

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