हिमाचल BJP अध्यक्ष ने दिल्ली पुलिस टकराव पर उठाए सवाल:राजीव बिंदल बोले- एजेंसियों के बीच टकराव पैदा किया, कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप

हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने शनिवार को धर्मशाला में प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच हालिया टकराव को लेकर मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार भारत की छवि खराब करने के आरोपी यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी कर रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस कोर्ट के आदेशों पर हिमाचल आई थी, लेकिन हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस कर्मियों पर अपहरण का मामला दर्ज कर एजेंसियों के बीच टकराव पैदा कर दिया। धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिंदल ने इस स्थिति को संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया और कहा कि राजनीतिक हितों के लिए एक पुलिस बल को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना उचित नहीं है। प्रदेश में वन,नशा और चिट्‌टा माफिया सक्रिय : बिंदल भाजपा अध्यक्ष ने प्रदेश में वन माफिया, नशा माफिया, ट्रांसफर माफिया और चिट्टा माफिया के सक्रिय होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और ईमानदार अधिकारी भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने 40 महीनों में जनता को “40 जख्म” दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आते ही डीजल पर 7.50 रुपए वैट बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डाला। उनके अनुसार, पिछले 40 महीनों में विभिन्न करों और दरों में वृद्धि कर सरकार ने जनता से लगभग 8 हजार करोड़ रुपए वसूले हैं। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन दर, बिजली-पानी और एचआरटीसी किराए में बढ़ोतरी से हर वर्ग प्रभावित हुआ है। सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने सरकार पर निजी स्कूलों से मिलीभगत का आरोप लगाया। बिंदल ने दावा किया कि जिन स्थानों पर सरकारी स्कूल बंद हुए, वहां निजी स्कूल खुल गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। बिंदल ने कहा कि सरकार ने करीब 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने 2022 में बदलाव की उम्मीद से कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी, लेकिन सरकार राहत देने के बजाय प्रदर्शन और धरनों की राजनीति में उलझी है।

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