डीडवाना के झालरिया मठ में चल रहे ब्रह्मोत्सव के छठे दिन भगवान जानकीनाथ चांदी की पालकी में विराजमान हुए। इस अवसर पर चीर लीला और प्रणय कलह लीला का मंचन किया गया। भगवान ने माता लक्ष्मी (गोदम्बा जी) के साथ कन्दुक (गेंद) लीला भी की, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला प्रसंग की कथा का वाचन पंडित वासुदेव शास्त्री ने किया। उन्होंने बताया कि यह कथा दाम्पत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और मधुरता बनाए रखने का संदेश देती है। मंदिर परिसर में स्थित यज्ञान्त स्नान उत्सव मंडप में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान को मांगलिक गुड़ अर्पित किया। बाद में इस गुड़ को गोष्ठी रूप में भक्तों के बीच प्रसाद के तौर पर वितरित किया गया, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है।
इसके उपरांत, भगवान गज वाहन पर विराजमान होकर मंदिर परिसर में निकले और भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। पूरे आयोजन में स्वामी घनश्यामाचार्य के सान्निध्य में युवराज स्वामी भूदेवाचार्य ने भक्तों को आशीर्वचन दिए और प्रसाद वितरित किया। ब्रह्मोत्सव का यह छठा दिन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।


