श्रीनाथजी मंदिर में होली दहन 3 मार्च मंगलवार को सूर्योदय के समय विधि-विधान से किया जाएगा। चंद्र ग्रहण के कारण इस बार मंदिर के सेवा क्रम और दर्शनों के समय में परिवर्तन किया गया है। होली और डोल उत्सव एक ही दिन, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाए जाएंगे। सुबह 3 बजे होगा शंखनाद पुष्टिमार्गीय प्रधानपीठ के तिलकायत विशाल बावा के निर्देश पर संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। इसके अनुसार 3 मार्च को सुबह 3 बजे शंखनाद होगा और डोल उत्सव का क्रम प्रारंभ होगा। सामान्यतः डोल उत्सव उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार यदि पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण दृश्य हो तो तिथि को प्रधानता दी जाती है। इसी आधार पर उत्सव पूर्णिमा तिथि में ही संपन्न होगा। गोदान का समय शाम 5.04 मंदिर प्रशासन के अनुसार चंद्र ग्रहण का वेध प्रातः 3.52 बजे से प्रारंभ होगा। ग्रहण का स्पर्श सायं 3.20 बजे तथा मोक्ष 6.47 बजे होगा। ग्रहण काल सायं 3.20 से 6.48 बजे तक रहेगा। इस दौरान मंदिर के पट खुले रहेंगे और श्रद्धालुओं को ग्रहण मोक्ष तक दर्शन कराए जाएंगे। गोदान का समय सायं 5.04 बजे निर्धारित किया गया है। मंगला, श्रृंगार और ग्वाल दर्शन नहीं खुलेंगे सेवा क्रम में बदलाव के तहत 3 मार्च को मंगला, श्रृंगार और ग्वाल दर्शन नहीं खुलेंगे। डोल के तीसरे-चौथे राजभोग दर्शन 10.30 बजे होंगे। उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन दर्शन नहीं होंगे। सूतक लगने से राजभोग का सखड़ी प्रसाद गौशाला भेजा जाएगा तथा उत्सव के बाद ग्रहण क्रम की सेवा पूरी की जाएगी।


