इंदौर में शुक्रवार रात 11.30 बजे से बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को हटाने का काम शुरू हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रात में नगर निगम के 50 अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम जीपीओ चौराहे पर जमा हुई। पहले दिन करीब 7 घंटे शनिवार सुबह 6 बजे तक काम चला। जोन क्रमांक 11 के जोनल अधिकारी गीतेश तिवारी ने बताया कि नगर निगम की टीम ने जीपीओ से शिवाजी वाटिका की ओर करीब सौ मीटर की रैलिंग हटा दी गई। बाकी हिस्से की रैलिंग आज रात से हटाई जाएगी। अब 11 किमी के रास्ते पर बॉटलनेक जैसी जगह नहीं रहेगी महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि 11 किमी का बीआरटीएस हटने के बाद बीच में बॉटल नेक जैसी कोई जगह नहीं रहेगी। पूरा रोड करीब 60 मीटर चौड़ा हो जाएगा। बीच में जहां सरकारी विभागों की दीवारें हैं उन्हें हटाकर सड़क चौड़ी की जाएगी। सड़क के दोनों ओर से बसें चलाई जाएंगी। बसों की संख्या भी बढ़ाएंगे महापौर ने कहा कि बीआरटीएस पर बसें बंद नहीं होंगी। पूरे शहर में इंटरसिटी बसों का जाल बिछाने के लिए हम निर्णय ले चुके हैं। शहर में 900 बसें चलाई जाना हैं। केंद्र और राज्य सरकार की मदद से 500 बसों का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। 400 और बसों के लिए भी हम प्रयास कर रहे हैं। बीआरटीएस पर जहां से स्टेशन हटाए जाएंगे उसके आसपास ही दूसरे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। ताकि यात्री वहां से टिकट ले सकें। सड़क के दोनों ओर बस स्टैंड भी बनाएंगे। यहां से दूसरे लोक परिवहन जैसे ई रिक्शा और रिक्शा की कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जाएगी। तस्वीरों में देखिए ऐसे हटा रहे डिवाइडर-रैलिंग तीन स्टेशन भी प्रभावित होंगे शिवाजी वाटिका से नवलखा चौराहे के बीच तीन बस स्टेशन भी हैं। डिवाइडर और रैलिंग हटाने के बावजूद इन्हें अभी नहीं हटाया जाएगा। यहां से यात्रियों को चढ़ने व उतरने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नगर निगम बेरिकेडिंग भी करेगा। महापौर बोले- पूरे प्रोजेक्ट में 3-4 महीने लगेंगे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दैनिक भास्कर से कहा कि इसे हटाने का पूरा काम यह तकनीकी रूप से एजेंसी तय करके किया जाएगा। बीच-बीच में बने स्टेशनों पर लगे सॉफ्टवेयर और हार्डवेअर हटाए जाएंगे। स्क्रीन भी हटाई जाएगी। पूरा तोड़कर ठीक से रोड बनाने में कम से कम चार माह का समय प्रस्तावित है। इसके लिए नगर निगम मद से खर्च किया जाएगा। लेकिन मलबे से नगर निगम को इनकम भी होगी। दो जनहित याचिकाएं दायर हुई थीं, दोनों पर साथ चली सुनवाई बता दें कि इंदौर में निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक करीब 11.5 किमी लंबा बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) बना हुआ है। इसे लेकर दो जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लगी थी। याचिकाओं को हाईकोर्ट की मुख्य पीठ (जबलपुर) ट्रांसफर कर दिया गया था। जबलपुर हाईकोर्ट ने इंदौर बीआरटीएस को हटाने के आदेश दिए हैं। उपयोगिता जांचने के लिए बनी थी कमेटी हाईकोर्ट ने मौजूदा परिस्थितियों में बीआरटीएस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच के लिए 5 सदस्यों की कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। जिसमें सीनियर वकील अमित अग्रवाल के साथ ही आईआईएम और आईआईटी के डायरेक्टर की ओर से नॉमिनेट एक्सपर्ट्स शामिल थे। हाईकोर्ट इसके पहले भी साल 2013 में बीआरटीएस की उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच के लिए कमेटी गठित कर चुका है।


