शहर की दो फर्मों पर करोड़ों रुपये के बैंक लोन में धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की शिकायत पर दो फर्मो से जुड़े 6 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि लुधियाना पुलिस ने पहले बैंक की शिकायत लेने से मना कर दिया। लेकिन जब शिकायत एडीजीपी पंजाब लक्ष्मी कांत यादव के पास गई तो उनके दखल पर 7 महीने की जांच के बाद थाना डिवीजन-5 की पुलिस ने अनुभव मोदी, आशीष मोदी, सारिका मोदी, रोहिणी मोदी, साहिल मोदी और विजय कुमार मोदी के खिलाफ केस दर्ज किया है। झूठी बैंक स्टेटमेंट दिखाकर लोन पास करवाया: शिकायतकर्ता बैंक मैनेजर गौरव गुप्ता ने बताया कि साल 2023 में आरोपियों ने आरोपियों ने बैंक से कुल 18 करोड़ रुपए का लोन धोखे से लिया था। जिसमें एम/एस मोदी सॉल्वैक्स को 9.55 करोड़ रुपए रुपए का टर्म लोन और एम/एस एमजीएम सॉल्वैक्स को 8.44 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सुविधा दी गई। आरोपियों ने झूठी बैंक स्टेटमेंट और गलत दस्तावेज देकर अपने कारोबार को मुनाफे वाला दिखाया और बैंक को गुमराह कर लोन पास करवाया। लोन की शर्तों के अनुसार यह राशि केवल व्यापार के लिए इस्तेमाल होनी थी, लेकिन आरोपियों ने इसे निजी उपयोग और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। अप्रैल 2024 से मई 2025 के बीच अनुभव मोदी, आयुषी मोदी, सारिका मोदी, सांची मोदी और रोहिणी मोदी के खातों में लाखों रुपए भेजे गए। {डीसीपी सिटी की जांच रिपोर्ट के बाद केस हुआ दर्ज: बैंक की शिकायत पर पहले डीसीपी सिटी ने जांच कर रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में कहा गया कि बैंक को गलत जानकारी दी गई और गिरवी रखा गया सामान बिना अनुमति बेच दिया गया। इसके बाद जिला अटॉर्नी (लीगल) ने कानूनी राय दी कि यह केवल लोन न चुकाने का मामला नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और विश्वासघात का अपराध बनता है। जिला अटॉर्नी की राय के आधार पर पुलिस कमिश्नर लुधियाना ने केस दर्ज करवाया। बैंक को दिए गए स्टॉक स्टेटमेंट में मार्च 2025 तक 14.69 करोड़ रुपए का माल और 6.29 करोड़ रुपए की उधारी दिखाई गई, लेकिन जब बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो दोनों फैक्ट्रियां बंद पाई गईं और न तो सामान मिला और न ही कोई व्यापारिक गतिविधि मिली। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने जानबूझकर झूठी जानकारी दी और बैंक को धोखा दिया। आरोपियों ने बैंक की अनुमति के बिना गिरवी रखा गया माल बेच दिया, जिससे बैंक का भारी नुकसान हुआ। उन्होंने लोन की शर्तों का उल्लंघन किया और जानबूझकर किश्तें नहीं चुकाईं।


