डेयरियों को शिफ्ट कराने का निगम का प्लान फेल

निगम का डेयरियों को शहर से बाहर 28 फरवरी तक शिफ्ट कराने का प्लान फेल हो गया है। फताहपुर में 116 प्लांटों का ई-ऑक्शन कराने को लेकर 27 फरवरी की डेट तय की गई थी जिसमें 600 वर्गगज के 74 तो 300 के 42 प्लाट शामिल थे। 20 से 24 फरवरी तक डेयरी मालिकों को रजिस्ट्रेशन का मौका दिया गया था मगर किसी डेयरी मालिक ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। ई-ऑक्शन फेल होने की वजह प्लाट के रेट 12,500 रुपए प्रति गज तय किया जाना है। चूंकि निगम फताहरपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में जिस जगह की ई-ऑक्शन करा रहा, वहां नरक जैसे हालात बने हुए हैं। साल 2002-03 में 100 डेयरियां शिफ्ट कराई गई थी मगर 24 साल बाद भी बेहतर तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। डेयरी मालिकों ने कैलकुलेशन किया था कि सरकारी नियम अनुसार एक पशु के लिए 12 गज जगह होनी चाहिए। यानि कि 100 पशु के लिए 1200 गज। लेकिन ऑक्शन को लेकर जो 12,500 रुपए रेट तय किया गया है, उस हिसाब से एक हजार गज जगह 1.25 करोड़ की बनेगी। वहीं, 60 से 70 लाख रुपए पशुओं के लिए डेयरी तैयार करने में लग जाएगा। इतनी आमदन तो बरसों के बिजनेस में भी नहीं कर पाएंगे। डेयरी मालिकों ने रेट 4 से 5 हजार रुपए प्रति गज करने की डिमांड निगम व प्रशासनिक अफसरों से की थी। डीसी से मीटिंग को समय मांगा गया मगर सुनवाई नहीं हुई। परिणाम यह रहा कि किसी डेयरी मालिक ने ई-ऑक्शन में हिस्सा नहीं लिया। ई-ऑक्शन को सफल बनाने को ज्वाइंट कमिश्नर के निर्देशन में 9 मेंबरी कमेटी बनाई थी लेकिन कमेटी की कार्यशैली भगवान भरोसे ही रही। 24 फरवरी तक कितने रजिस्ट्रेशन हुए डाटा टेंडर क्लर्क के भरोसे था। कमेटी में कई अफसरों से पूछने पर जवाब नहीं था कि कितने रजिस्ट्रेशन हुए हैं। सबका एक ही जवाब मिला कि टेंडर क्लर्क सारा काम देख रहा है जबकि क्लर्क को सारी जानकारी कमेटी को शेयर करनी चाहिए। यदि कमेटी डेयरी मालिकों संग बातचीत करती तो हल निकाला जा सकता था। गौर हो कि निगम ने शहर के अंदर 354 डेयरियां व 5,443 पशु का आंकड़ा सार्वजनिक किया था। जिस हिसाब से ऑक्शन सफल भी हो जाए तो सिर्फ 116 डेयरियां शिफ्ट हो पाएंगी। ज्वाइंट कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर, एस्टेट अफसर, 2 काउंसलर, डीसीएफए, हेल्थ अफसर, लीगल एडवाइजर, एसई सिविल की कमेटी बनाई गई थी मगर 9 मेंबरी कमेटी ऑक्शन को सफल नहीं बना पाई।

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