हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकारी आवास खाली कराने के खिलाफ दायर याचिकाओं को पीआईएल के रूप में लेने और आग्रह से आगे जा निर्देश देने को गलत माना। खंडपीठ ने 24 व 29 अप्रैल के वे आदेश रद्द कर दिए, जिनमें अपीलार्थी को जमानती वारंट से तलब कर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह व जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने यह आदेश उपेन्द्र सिंह की अपील पर दिया। अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने बताया कि एकलपीठ के समक्ष सरकारी आवास खाली कराने के नोटिस को चुनौती दी गई थी। प्रार्थी के रिटायर होने पर 24 फरवरी 2025 को विवाद समाप्त माना गया, लेकिन याचिका निस्तारित करने के बजाय राज्य से ऐसे कर्मचारियों का ब्योरा मांगा, जो रिटायर या तबादले के बाद भी आवास में रह रहे थे। जानकारी नहीं देने पर दिव्येश माहेश्वरी को कोर्ट कमिश्नर व योगिता बिश्नोई को समन्वयक नियुक्त किया। निरीक्षण में अपीलार्थी की अनुपस्थिति में घर पहुंचने पर लौटने पर पड़ोसी से विवाद हुआ। एकलपीठ ने 24 अप्रैल को जमानती वारंट और 29 अप्रैल को FIR के आदेश दिए। अपील में कहा- रिट को आपराधिक मामला बना दिया गया, इसलिए आदेश रद्द किए जाएं।


