मानसरोवर में शुक्रवार को रोडवेज में आग की घटना के बाद भास्कर ने शनिवार को सिंधी कैंप बस स्टैंड पर 4 घंटे तक रियलिटी चेक किया। इस दौरान रोडवेज की साधारण, एक्सप्रेस, डीलक्स और एसी-स्लीपर श्रेणी की 50 बसों की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि एक भी बस सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिली। अधिकांश बसों में पर्याप्त इमरजेंसी गेट नहीं थे या उनके सामने सीटें लगी हुई थीं। “बसों में नियमों के तहत ही इमरजेंसी गेट बने हुए हैं। इमरजेंसी गेट के सामने लगी सीट नहीं हटाई, लेकिन नियमों में जितनी जगह होनी चाहिए, उतनी जगह छोड़ी गई है। स्लीपर बसों में पीछे की जगह साइड में इमरजेंसी गेट बने हुए हैं।” -पंकज शर्मा, कार्यकारी निदेशक, यांत्रिक ये मिले हालात ये हैं नियम यह होना जरूरी
निकास मार्ग पूरी तरह अवरोध रहित हो। सीट, हैंडरेल या फिटमेंट से बाधित नहीं। इमरजेंसी डोर अंदर- बाहर संचालित हो सके। निकास पर स्पष्ट रूप से ‘EMERGENCY EXIT’ अंकित हो और खुलने की दिशा का तीर बना हो। आपातकालीन प्रकाश और संचालन निर्देश प्रदर्शित होना जरूरी। 4 डिपो की बसों में एक जैसे हालात: यात्रियों की जान से खेल रहे जिम्मेदारों पर सवाल?


