होली का पर्व शहर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पर्व पर शहर में भी लोग गए दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली खेलेंगे। होली के मौके रंग और गुलाल की दुकानें सज चुकी है, लेकिन खास बात यह है कि यदि आप घटिया क्वालिटी का रंग और गुलाल यूज करते हैं तो यह सिर्फ आपकी स्किन और आंखों को ही नहीं बल्कि फेफड़ों तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ऐसा हम नहीं बल्कि एक्सपर्ट खुद कह रहे हैं। क्योंकि इन दिनों मशीनों से होली खेलने का क्रेज बढ़ रहा है। जिसमें गुलाल को महीन पाउडर के तौर पर मिक्स कर उड़ाया जाता है तो फेफड़ों तक पहुंचता है। इसके चलते आगे चलकर बड़ी समस्या भी उत्पन हो सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट ने इस होली को पारम्परिक तरीके और सावधानीपूर्वक खेलने की सलाह दी है। कमला नेहरू नगर चेस्ट एंड टीबी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर सीआर चौधरी ने बताया कि जोधपुर में होली के मौके पर लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली खेलते हैं। होली के कलर के कई तरह के साईड इफैक्ट है।, लेकिन इसकी मिस्ट बनाकर पाउडर बनाकर जो स्प्रे मशीन के जरीए किया जाता है ऐसे में उसके जो महीन कण होते हैं वो उड़कर फैफड़ों के अंदर चले जाते हैं।
खासतौर पर अस्थमा, स्वांस रोगियों के लिए तो यह गंभीर खतरा है, लेकिन आम नागरिकों को भी इसमें सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि कई बार देखा गया है कि गुलाल से लेकर कलर भी बाजार में केमिकल वाले मिलते हैं। इसलिए सभी से अपील है कि सही तरीके से होली खेलें जिससे किसी भी प्रकार का साइड इफैक्ट नहीं हो। आई एक्सपर्ट भी बोले एमडीएम हॉस्पिटल के डॉक्टर अरविंद चौहान के मुताबिक नकली गुलाल आंखों को नुकसान पहुंचाता है। बाजार में कई बार केमिकल वाले रंग से होली खेलने के दौरान कलर आंखों में चला जाता है जो काफी नुकसान पहुंचाता है।


