नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मुम्बई में संस्कार भारती द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय सिने टॉकीज 2024 आयोजित किया गया। इसमें गुना के युवा फिल्म डायरेक्टर माही दुबे ने भी भाग लिया। उन्होंने परिचर्चा में भी अपनी बात रखी। सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि में मध्यप्रदेश से सम्मिलित होने वाले फिल्म निर्देशक माही दुबे ने सिने टाक्स में संवाद किया। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक के बाद से जब भारत के सिनेमा पर मुख्यता ‘डी कंपनी’ जैसे लुटेरों का प्रभाव था, जिनको केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से मतलब होता था। तब कुछ निर्माता या लेखकों की जोड़ी ने हॉलीवुड में बनी ‘हिट वेस्टन जॉनर’ से प्रेरित हो कर फिल्में बनाई। उस समय की ट्रेंड सेटर बनी तो ये कुछ समय चला भी। इसी के प्रति उत्तर में बीबीसी ने इस सिनेमा का उपहास उड़ाते हुए पहली बार ‘बॉलीवुड’ शब्द का उपयोग किया, जो व्यंगात्मक एवं भारतीय सिनेमा का मजाक उड़ाने बाला शब्द था। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है, हमे पुनः अपनी जड़ों की ओर जाना होगा। ऐसे सिनेमा का सृजन करना होगा जिसमे भारतीय संस्कृति की सुगंध हो। डायरेक्टर दुबे ने ये भी आग्रह किया कि हम बॉलीवुड, लॉलीवुड, टॉलीवुड जैसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग न करते हुए ”हिंदी सिनेमा, तमिल सिनेमा, तेलगु सिनेमा, मलयालम सिनेमा, हरियाणवी सिनेमा” या क्यू न भारतीय सिनेमा इन हिंदी भाषी भारतीय शब्द का प्रयोग करें। इससे सम्पूर्ण भारतीय सिनेमा एक दिखाई देता है ओर गर्व की अनुभूति होती है। भारतीय सिनेमा को मात्र बॉलीवुड कह देना, सम्पूर्ण फ़िल्म इंडस्ट्री का अपमान है। सिने टाकीज 2024 कार्यक्रम का उद्घाटन एक्टर, डायरेक्टर सचिन पिलगांवकर, अभिनेत्री खुशबू सुंदर, अभिनेत्री भारती एस प्रधान और एनएसई मुंबई के अध्यक्ष आशीष चौहान जी ने किया। लगातार तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रम की थीम “वुड्स टू रूट्स” रही, जहां सिनेमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई और सत्र चले। इस फिल्म महाकुंभ में निर्देशक मधुर भंडारकर, विपुल शाह, शिवाशीष सरकार, एक्टर स्वप्निल जोशी, प्रोड्यूसर वेंकट नारायन, निर्देशक राहुल भोले, मृणाल कुलकर्णी, निर्दर्शक अभिषेक शर्मा, निर्देशक अपूर्व सिंह कर्की, नील माधव पंडा, नीरेन भट्ट, शुक्लपक्ष वाले पंकज शुक्ला, अभिजीत देशपांडे, रंगेश तोरानी, पद्मश्री वामन केंद्रे सहित कई लोग शामिल हुए।


