अलवर में नागौरी परंपरा से स्वांग निकाला गया:सेठ,सेठानी,फकीर और मुनीम बाजारों में बही-खाते लेकर निकले

अलवर शहर में पहल सेवा संस्थान की ओर से रविवार को होली से एक दिन पूर्व मुख्य बाजार में ऐतिहासिक और परंपरागत राजशाही नानकशाही सेठ-सेठानी का स्वांग निकाला गया। नागौरी परंपरा से जुड़ा यह करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना स्वांग देखने के लिए बाजार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्वांग में सेठानी ऊंट पर सवार होकर शहर की रंगत देखती हुई चलती नजर आईं, जबकि सेठजी और उनके मुनीम हाथ में बही-खाते लेकर बाजार में व्यापारियों से हंसी-मजाक अंदाज में हिसाब-किताब लेते दिखाई दिए। उनके संवादों और ठिठोली ने लोगों को खूब गुदगुदाया। सेठ की भूमिका निभाने वाले शंकर लाल ने बताया कर लगभग 20 साल से यह स्वांग निकाला जा रहा है।और यह पहल सेवा सस्थांन द्वारा यह निकला जाता है।इसमें सेठ,सेठानी ,फकीर और मुनीम का रोल होता है।इसमें सेठ और फकीर की जुगल बंदी होती है सेठानी की वजह से।और सेठानी आकृषण का केंद्र होती है। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने काशीराम चौराहे स्थित सुगन की बगीची के मंदिर में पूजा-अर्चना कर कलाकारों का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने स्वांग को रवाना किया, जो काशीराम सर्किल से प्रमुख बाजारों से होता हुआ कंपनी बाग पहुंचा, जहां कलाकारों का सम्मान किया गया। पहल सेवा संस्थान के अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने बताया कि इस स्वांग के साथ ही अलवर में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।

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