कोंडागांव जिले में केंद्र सरकार के निर्देश पर मानसिक स्वास्थ्य का व्यापक सर्वेक्षण अभियान शुरू किया गया है। एम्स रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग की 10 सदस्यीय मेडिकल टीम ने निम्हांस के सहयोग से चयनित गांवों में बच्चों और वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य का घर-घर जाकर आकलन किया। यह सर्वेक्षण जिले के पांचों विकासखंडों में चिन्हांकित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों, पारों और टोलों में किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी ने सभी चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, सीएचओ, आरएचओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को एम्स की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर सहयोग करने के निर्देश दिए। बच्चों में नकारात्मक सोच जैसी बढ़ती समस्याओं पर फोकस जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आर.के. चंद्रवंशी ने बताया कि व्यक्ति तभी पूर्ण रूप से स्वस्थ माना जाता है जब वह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने वर्तमान में बच्चों और वयस्कों में जिद्दीपन, चिड़चिड़ापन, अनावश्यक चिंता, नशे की प्रवृत्ति, सामाजिक अलगाव, स्मरण शक्ति में कमी और नकारात्मक सोच जैसी बढ़ती समस्याओं पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों के अनुसार, 13 से 17 वर्ष की आयु के किशोरों में मानसिक विकारों के लक्षण तेजी से देखे जा रहे हैं। समय रहते परामर्श न मिलने पर व्यक्ति अवसाद, आपराधिक प्रवृत्ति या आत्मघाती विचारों की ओर भी बढ़ सकता है। मानसिक और नशे से जुड़े विकारों का सर्वेक्षण करना एम्स रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग के समन्वयक डॉ. राकेश भारती ने बताया कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य मानसिक एवं नशे से जुड़े विकारों की स्थिति का आकलन कर शोध करना है, ताकि भविष्य में प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें। छत्तीसगढ़ के छह जिलों – कोंडागांव, बालोद, बेमेतरा, कोरिया, रायपुर और बलौदाबाजार – को इस सर्वेक्षण के लिए चयनित किया गया है। पांच जिलों में सर्वे पूरा होने के बाद, अंतिम चरण में कोंडागांव विकासखंड के ग्राम संबलपुर, किबईबोलगा और मालाकोट में यह सर्वे संपन्न किया गया। नागरिकों के लिए जिला अस्पताल में कक्ष क्रमांक 12 में संचालित “स्पर्श क्लिनिक” में नियमित जांच, उपचार और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, मानसिक तनाव या समस्या होने पर टेली-मानस टोल फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।


