इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब विदेशों में फंसे भारतीयों पर भी दिखने लगा है। चित्तौड़गढ़ निवासी और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष शक्ति सिंह राठौड़ दुबई में अटके हुए हैं। वे एक दोस्त के घर आयोजित सांस्कृतिक प्रोग्राम में शामिल होने के लिए दुबई गए थे। उनकी वापसी 28 फरवरी को तय थी, लेकिन आखिरी समय पर उनकी फ्लाइट रद्द हो गई। राठौड़ ने बताया कि वे 23 फरवरी को जयपुर से दिल्ली पहुंचे और वहां से दुबई की फ्लाइट ली। उनके साथ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, उज्जैन महाकाल के पुजारी विकास शर्मा सहित कुछ दोस्त भी गए थे। कार्यक्रम के बाद तीरथ सिंह रावत 25 फरवरी को भारत लौट आए, जबकि बाकी साथियों की वापसी 28 फरवरी को थी। प्लेन में बैठने के बाद सरकार ने रद्द की फ्लाइट उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को वे एयरपोर्ट पहुंचे, चेक-इन और बाकी प्रक्रिया पूरी की और प्लेन में जाकर अपनी सीट पर बैठ गए। करीब आधा घंटा बीता, फिर एक घंटा हो गया, लेकिन विमान ने उड़ान नहीं भरी। ऐसे उन्हें प्लेन में बैठे 3 घंटे हो चुके थे। बाद में जानकारी मिली कि इजराइल-ईरान तनाव के कारण कुछ उड़ानों को सरकार ने अनुमति नहीं दी गई है। इसके बाद फ्लाइट रद्द कर दी गई। प्लेन से उतरने के बाद एयरपोर्ट पर काफी भीड़ थी, क्योंकि कई अन्य उड़ानें भी रद्द हो चुकी थीं। टिकट रद्द कराने और नई फ्लाइट की जानकारी लेने के लिए यात्री परेशान दिखे। शाम करीब 7 बजे वे एयरपोर्ट से बाहर निकले और होटल पहुंचे। होटल में बज रहा था बार-बार अलर्ट राठौड़ के अनुसार, रात करीब 11:30 बजे होटल में अचानक कई बार अलर्ट सायरन बजा। होटल के लोग नीचे लॉबी में इकट्ठा हो गए। वे पूरी रात ठीक से सो नहीं सके। टीवी पर खबरें देख रहे थे। खबरों में बताया जा रहा था कि कुछ बड़े होटलों को निशाना बनाया गया है। इससे डर का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर वे होटल छोड़कर अपने एक दोस्त के घर चले गए। उन्होंने कहा कि पूरी रात और सुबह तक धमाकों जैसी आवाजें सुनाई देती रहीं। आमतौर पर पूरी रात सक्रिय रहने वाला शहर काफी शांत नजर आया और सड़कों पर सिर्फ इमरजेंसी गाड़ियां दिखीं। भारत सरकार से की अपील हालांकि उन्होंने कहा कि दुबई में हालात पूरी तरह बेकाबू नहीं हैं, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है। वे और उनके साथी फिलहाल सुरक्षित हैं। लगातार धमाकों की आवाज आ रही हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाए। चित्तौड़गढ़ में भी उनके परिवार और परिचित उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं।


