पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में 64 साल की महिला के रैक्टम का सफल ऑपरेशन किया गया। निवृत होते समय रैक्टम महिला की बॉडी से 10 CM तक बाहर आ जाता था। महिला ने झिझक के कारण परिवार को समस्या के बारे में नहीं बताया। समस्या बढ़ी तो उसने जानकारी दी। इसके बाद हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने पेट चीरकर इलाज किया। झिझक के कारण नहीं बता पाई गंभीर परेशानी पाली जिले के रोहट क्षेत्र के एक गांव की महिला मरीज शौच के लिए जाती तो रैक्टम (गुदा मार्ग) 10 CM तक बाहर आ जाता था। उसे हाथों से वापस उसे अंदर डालना पड़ता था। हर बार यही समस्या होने लगी। महिला दर्द के दौर से गुजर रही थी लेकिन उसने झिझक के कारण परिवार को नहीं बताया। इस समस्या से महिला इतनी डर गई कि 5 साल से वह अपने घर से बहुत कम निकलने लगी। परेशानी ज्यादा हुई तो उसने घरवालों को इसके बारे में बताया। परिजन उसे बांगड़ हॉस्पिटल ले गए। जहां जनरल सर्जरी डॉ. अनिल विश्नोई ने महिला की जांच के बाद ऑपरेशन की बात कही। जरूरी जांचों के बाद 12 फरवरी को पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। 14 फरवरी को ऑपरेशन किया गया और 23 फरवरी को हॉस्पिटल से छुट्टी दी गई। 1 मार्च को महिला चेक करवाने वापस हॉस्पटिल पहुंची। जहां उसकी स्थिति नॉर्मल थी। ऐसी की सर्जरी बांगड़ हॉस्पिटल के जनरल सर्जन डॉ अनिल विश्नोई ने बताया- महिला की रैक्टल प्रोलैप्स सर्जरी (रेक्टोपेक्सी) की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों में यह समस्या देखने को मिलती है। बुढ़ापे में मांसपेशियां कमजोर होने से शौच जाते समय जोर लगाने के दौरान रैक्टल बाहर आ जाता है। महिला 5 साल से परेशान थी। उनके पेट के चीरा लगाकर रैक्टल प्रोलैप्स सर्जरी (रेक्टोपेक्सी) सर्जरी की गई। बोली- आंतें बाहर आ जाती थीं, अब कोई तकलीफ नहीं महिला ने बताया- पांच साल से परेशान थी। घर से बाहर निकलने में भी डर लगता था। ऑपरेशन के बाद किसी तरह की तकलीफ नहीं है। ऑपरेशन करने वाली टीम में ये रहे शामिल बांगड़ हॉस्पिटल के प्रोफेसर जनरल सर्जरी डॉ अनिल विश्नोई, डॉ मनीष चौधरी, डॉ जेपी रांगी, डॉ अनीस अहमद, डॉ हनुमान विश्नोई, डॉ यशपालसिंह , एनिथिसिया नरेन्द्र सीरवी, डॉ ऊषा शामिल रहे।


