भास्कर न्यूज | अंबिकापुर 78वें अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर अणुव्रत समिति सरगुजा इकाई ने जन शिक्षण संस्थान अम्बिकापुर में संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न विधाओं के प्रशिक्षणार्थियों और छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अणुव्रत के मूल सिद्धांतों- नैतिकता, संयम और मानवीय मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना और आधुनिक समाज में इनके महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डिप्टी कलेक्टर रामराज सिंह ने कहा, आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। हमारी शिक्षा, संस्कार और समृद्ध संस्कृति का निरंतर ह्रास हो रहा है। उन्होंने अणुव्रत की आचार संहिता का उल्लेख करते हुए बताया कि जब हम इन नियमों का अध्ययन करते हैं, तब हमें आभास होता है कि अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाना कितना अनिवार्य है। बड़े बदलाव हमेशा छोटे-छोटे संकल्पों से शुरू होते हैं। यदि हम स्वयं में सुधार का दृढ़ संकल्प लें, तो यही अणुव्रत का सच्चा संदेश होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान आने वाले समय में बच्चों और युवाओं के चरित्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम का संचालन जन शिक्षण संस्थान के निदेशक एम. सिद्दीकी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सरगुजा साइंस ग्रुप के अंचल ओझा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में रंजीत मालू, महेंद्र बोथरा, हनुमान डागा, मनोज बोथरा, हेमलता शर्मा का योगदान रहा। साथ ही प्रतिमा त्रिपाठी, रमेश यादव, अंजुमाला तिर्की, वंदना मानिकपुरी, रेणु यादव और पल्लवी विश्वकर्मा सहित संस्थान के स्टाफ और प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। अनुशासन और संयम का कोई विकल्प नहीं जिला परियोजना अधिकारी (साक्षरता) गिरीश गुप्ता ने कहा कि 78वां स्थापना दिवस हमें यह सीख देता है कि जीवन में अनुशासन और संयम का कोई विकल्प नहीं है। यदि प्रत्येक व्यक्ति व्यक्तिगत स्तर पर नैतिक बने, तो समाज स्वतः ही सुधर जाएगा। वहीं, अणुव्रत समिति की राज्य प्रभारी ममोल कोचेटा ने आंदोलन की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह अभियान जन-सहयोग और निःस्वार्थ सेवा भावना से प्रदेशभर में फैल रहा है। उन्होंने राज्य में आयोजित अन्य कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए आत्मसंयम और सकारात्मक चिंतन पर जोर दिया।


