सरायकेला | झारखंड की कला नगरी जिसे कहा जाता है, वहां होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था का जीवंत उत्सव है। यहां ब्रज की तर्ज पर निकलने वाली दोल यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पालकी पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं और भक्तों के द्वार पहुंचकर आशीर्वाद देते हैं। सोमवार को अपराह्न 3 बजे भगवान पालकी पर सवार होकर श्रद्धालुओं संग होली भी खेलेंगे। आध्यात्मिक उत्थान श्री जगन्नाथ मंडली, सरायकेला के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव की जानकारी संस्थापक ज्योतिलाल साहू ने दी। उन्होंने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को होने के बावजूद चंद्र ग्रहण के सूतक काल को देखते हुए इस वर्ष दोल यात्रा सोमवार को ही आयोजित की जाएगी। अपराह्न 3 बजे भगवान श्रीकृष्ण को पालकी में विराजमान कराया जाएगा, जिसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के साथ नगर परिक्रमा प्रारंभ होगी। सरायकेला में दोल यात्रा की परंपरा 1818 में सरायकेला स्टेट के महाराजा उदित नारायण सिंहदेव के समय से चली आ रही है। वर्ष 1990 से इसका संचालन आध्यात्मिक उत्थान जगन्नाथ मंडली द्वारा किया जा रहा है। पालकी यात्रा का शुभारंभ कंसारी टोला स्थित मृत्युंजय खास श्री राधा कृष्ण मंदिर से होगा। गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के बीच भगवान और राधा रानी नगर भ्रमण करेंगे। भक्त अपने घरों के बाहर आरती उतार कर, गुलाल अर्पित करते हैं और दर्शन मात्र से मोक्ष की कामना करेंगे।


