राष्ट्रसंत और भारत गौरव पुलक सागर महाराज के ज्ञान गंगा महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को बड़ी संख्या में लोग उमड़े। महाराज संघ का जैन समाज की ओर से बहुमान किया गया और लोगों ने उनसे आशीर्वाद लिया। राष्ट्रसंत पुलक सागर महाराज ने आज तीसरे दिन क्रोध से दूर रहने का पाठ सिखाते हुए कहा कि एक आदमी अपनी खुशहाल जिंदगी में कितनी सारी समस्याओं का निर्माण कर लेता है। कुछ समस्याएं तो होती ही नहीं है, लेकिन उन्हें बना लेता है। ये समस्या सभी जाती, धर्म के लोगो में होती है। ये एक सार्वजनिक समस्या है। जिसका हल हम ढूंढ नहीं पाते है। महाराज ने कहा कि ये समस्या है क्रोध। क्रोध सभी को आता है चाहे वह मनुष्य हो, पशु हो या कोई जानवर हो। सभी को क्रोध आता है। लेकिन क्रोध को मत पालो। बच्चे को पालो लेकिन क्रोध से दूर रहो। क्रोध बहुत खतरनाक है। इससे कोई छूटा नहीं है। राष्ट्रसंत ने कहा कि जिंदगी एक रंग भूमि है। जब मनुष्य का धरती पर अवतार होता है तो जिंदगी उसे रंग भूमि की तरह मिला करती है, लेकिन जैसे-जैसे आदमी बड़ा होता है। इसी जिंदगी को रंग भूमि की जगह रण भूमि में बदल दिया करता है। अपने निजी स्वार्थों की वजह से रंग भूमि जैसा जीवन रण भूमि जैसा लगने लगता है और इसकी वजह है क्रोध। शादी के पहले क्रोध आता है और शादी के बाद भी क्रोध। मन शांत नहीं होता है। राष्ट्र संत ने संयुक्त परिवारों में क्रोध को सहन करने के लिए परिवार के लोगो का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे। उस समय भी परिवार के लोगों को क्रोध आता था। लेकिन उस समय एक को क्रोध आता तो एक दूसरे को बांट लेते। एक गुस्सा करता तो दूसरा शांत। लेकिन आजकल एकल परिवार में गुस्सा तो सबको आता है, लेकिन शांत करने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में परिवार टूटने लगते है। इसलिए क्रोध को हमेशा जिंदगी से दूर रखने का प्रयास करो।


