जल विहार कॉलोनी में खुली कमर्शियल दुकानों पर हाई कोर्ट सख्त, अब कोर्ट

तेलीबांधा के पास स्थित जलविहार कॉलोनी में कमर्शियल दुकानों का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। यहां के लोग लगातार आवासीय कॉलोनी में खुले जिम, कैफे समेत सभी कमर्शियल दुकानों का विरोध कर रहे हैं।
इस मामले में पहले पीएमओ दफ्तर में शिकायत की गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई। उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त कर उन्हें मौके से जांच रिपोर्ट बनाकर अदालत में पेश करने को कहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी। हाई कोर्ट की सख्ती पर निगम अफसर भी हड़बड़ा गए हैं। अब पुराने दस्तावेजों को भी बाहर निकाला जा रहा है। तेलीबांधा तालाब के पास बनी जलविहार कॉलोनी 1978 में बनाई गई थी। इसमें 2 गार्डन थे। 1998 में इस कालोनी को नगर निगम रायपुर को हैंडओवर कर दिया गया था। इसी साल से निगम वाले यहां रहने वाले लोगों से संपत्ति, जल और सफाई कर की वसूली कर रहे हैं। 2019 में निगम ने यह कालोनी अपने अधीन एक कंपनी ईसीएचटी को सौंप दी थी। इस कंपनी ने गार्डन की जमीन पर ही 50 दुकानें बना दी। कई बड़े कमर्शियल झूले भी लगा दिए थे। दैनिक भास्कर ने सबसे पहले इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद निगम के अफसरों ने आनन-फानन में गार्डन से झूले हटवाए थे। लेकिन अभी तक पूरे झूले नहीं हटे हैं। गार्डन के एक हिस्से में अभी भी कई झूले लगे हुए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट वाय सी शर्मा ने भी हाईकोर्ट में गार्डन से पूरे झूले नहीं हटने की जानकारी दी है। कॉलोनी वालों ने कोर्ट को सौंपे पूरे दस्तावेज

जल विहार कॉलोनी के अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने बताया कि आवासीय कॉलोनी को कमर्शियल मार्केट में तब्दील कर दिया गया है। इसके शिकायत कई बार कलेक्टर, निगम कमिश्नर और पीएमओ दफ्तर में भी की जा चुकी है। पीएमओ ऑफिस ने निगम वालों से सवाल भी पूछा था। कॉलोनी वालों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया था कि गार्डन की जमीन को कथित तौर पर एक प्राइवेट कंपनी को दे दिया गया था। पूरी कॉलोनी का व्यवसायीकरण कर दिया गया है। इसके जवाब में निगम के ईई ने पीएमओ को बताया था कि मैथिली शरण गुप्त गार्डन में लगे झूले हटा दिए गए हैं। तेलीबांधा तालाब के आसपास मनोरंजन के लिए मेंटेनेंस का काम नगर निगम और इंटीग्रेटेड प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए एग्रीमेंट के अनुसार ही किया जा रहा है। निगम के इस जवाब से नाराज होकर ही कॉलोनी के लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अब नई रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।

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