पत्नी व बच्चे की रिहाई की मांग नामंजूर:हाई कोर्ट ने कहा – बिना वीसा रहने वालों को देश से डिपोर्ट करना सरकार का अधिकार

हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी पत्नी और उससे हुए बच्चे को नारी निकेतन से रिहा करने की मांग करते हुए लगाई गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत में रह रहे विदेशी नागरिक को उनके देश वापस भेजने तक सुरक्षित कस्टडी में रखना अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। बिलासपुर निवासी हृदय शर्मा ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी, बताया कि उसने एक बांग्लादेशी मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह किया है। दोनों के बीच 4-5 साल से संबंध थे और धर्म अलग होने के कारण युवती के परिजन विवाह के खिलाफ थे। इसके बाद दोनों ने मंदिर में विवाह कर लिया और जुलाई 2023 से बिलासपुर के देवरीखुर्द में रहने लगे। इस बीच एक एनजीओ की शिकायत पर हृदय के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

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