नीमकाथाना के पवन बराला क्षेत्र के युवा किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं। पवन ने आईटीआई और पॉलिटेक्निक कोर्स करने के बाद 8 माह तक एक कंपनी में नौकरी की लेकिन बेहतर भविष्य नजर नहीं आया। आखिर नौकरी छोड़कर खेती की राह पकड़ी। वह क्षेत्र में पहली बार फ्लोरिडा ऑयस्टर मशरूम उगाने में सफल हुए हैं। पवन बताते हैं, मुझे कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत दो दिन उन्नत कृषि फार्म के भ्रमण करने का अवसर मिला था। इस दौरान विभिन्न नवाचार देखे तो मशरूम की खेती करने का फैसला किया। सीकर में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लेने के बाद नीमकाथाना गणेश्वर रोड स्थित बृसिंह का बास में अपने खेत पर पहले अश्वगंधा की खेती शुरू की। बीस हजार रुपए का नुकसान हुआ मगर हिम्मत नहीं हारी। इस साल 10 जनवरी से फ्लोरिडा ऑयस्टर मशरूम की शुरुआत की। इसके लिए 25×12 फीट में अस्थाई रूप से कमरे तैयार किए। इसमें बड़ी समस्या यहां ज्यादा गर्मी ही है। इसलिए ऐसी बनावट रखी कि तापमान 30 डिग्री से कम रहे। इससे पारा 20 से 28 डिग्री तक रहा। इसके लिए 24 घंटे निगरानी जरूरी है। अब भी रोज 4 से 6 घंटे देखभाल में लग रहे हैं। अब तक इस खेती पर महज 19 हजार रुपए खर्च हुए हैं। यानी इतनी सी लागत से एक माह में उत्पादन लेना शुरू कर दिया। पवन ने बताया कि मशरूम की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है। प्रोटीन और फाइबर होने से इसकी अच्छी मांग भी रहती है। कोई किसान कृषि विभाग को प्रस्ताव दे तो राज्य उद्यान विकास समिति से स्वीकृति मिलने के बाद लागत का 40% अनुदान दिया जाता है। हालांकि तकनीकी ज्ञान बहुत जरूरी है क्योंकि तापमान नियंत्रित करना पड़ता है। साफ वातावरण में यह खेती सालभर की जा सकती है। कृषि विभाग प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देता है। पवन ने बताया, मैंने 15 किलो बीज से 114 पैकेट तैयार किए। ये बीज हिमाचल प्रदेश के सोलन से 5200 रुपए में मंगवाए थे। प्रत्येक पैकेट में करीब 3 किलो उत्पादन क्षमता है। ताजा मशरूम स्थानीय बाजार में 380 रुपए किलो बिकता है। ड्राई मशरूम 1280 रुपए प्रति किलो तक ऑनलाइन बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब दोस्त कुंदन सैनी और सोनू शर्मा के सहयोग से 114 की जगह 6500 पैकेट तैयार करने का लक्ष्य है।


