पंचायत चुनाव के लिए परिसीमॉन के बाद नई मतदाता सूची ने इस बार का ‘चुनावी संघर्ष’ कड़ा कर दिया है। परिसीमन के बाद जहां पंचायतें और वार्ड बढ़े हैं, वहीं प्रति पंचायत और वार्ड औसत मतदाता कम हुए हैं। इस का असर जीत-हार के अंतर और मुकाबले की प्रकृति पर पड़ सकता है। राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 2020-21 के 11,341 से बढ़कर अब 14,403 हो गई है। इसी तरह ग्रामीण वार्डों की संख्या 1,05,000 से बढ़कर 1,30,282 तक पहुंच गई है। यानी कुल मिलाकर करीब साढ़े 3 हजार नई इकाइयां जुड़ी हैं। इसके बावजूद औसत मतदाता प्रति पंचायत 3,033 से घटकर 2,793 रह गया है। प्रति वार्ड औसत मतदाता भी 327 से घटकर 309 हो गया है। इसका अर्थ है कि निर्वाचन इकाइयां छोटी हुई हैं और वोटर बेस अधिक बंटा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बड़ी पंचायतों में जहां 1000 से 1500 वोट हासिल करने वाला प्रत्याशी सरपंच बन सकता है, वहीं छोटी पंचायतों में 500 से 700 वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। पिछली बार कई स्थानों पर जीत का आंकड़ा 1500 से 2000 वोट तक जाता था। कुल मतदाता बढ़े, पर प्रति पंचायत औसत घटा महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि ग्रामीण मतदाता संख्या में वृद्धि हुई है। 2020-21 के चुनावों में संख्या 3.44 करोड़ थी। नई सूची के अनुसार यह 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार है। यानी 58 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। इस प्रकार कुल मतदाता आधार तो बड़ा हुआ है, लेकिन पंचायतों की संख्या बढ़ने के कारण प्रति पंचायत औसत मतदाता कम हुआ है। वार्डों में भी समीकरण बदला औसत मतदाता प्रति वार्ड 327 से 309 हो गए हैं। इसका असर पंच चुनाव पर पड़ेगा। 2020 की तुलना में कम वोटों में पंच चुना जा सकेगा। वार्डों की संख्या भी बढ़ी है, इसलिए प्रतिस्पर्धा अधिक सघन होने की संभावना है। 40%प्रत्याशी बढ़ेंगे इस बार दो बच्चों की शर्त खत्म होने से प्रत्याशियों की संख्या में 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है। पिछला चुनाव कोरोना काल में हुआ था। इस बार छह वर्ष के अंतराल के बाद हो रहे चुनाव को लेकर उत्साह अधिक है। 7 सीमावर्ती जिलों में अलग चुनावी समीकरण होंगे 7 जिलों…बांसवाड़ा, फलोदी, बाड़मेर, उदयपुर, डूंगरपुर, जैसलमेर और बीकानेर में आबादी के नियमों में विशेष छूट है। सामान्य क्षेत्रों में 3000 की आबादी पर पंचायत गठित होती है, जबकि इन जिलों में 1500 से 2000 आबादी पर नई पंचायतें बनी हैं। ऐसे में कई पंचायतों में कुल मतदाता संख्या 1200 से 1600 के बीच रह गई है। ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में 400 से 550 वोट पाने वाला प्रत्याशी भी सरपंच बन सकता है।


