टोंक में होलिका दहन आज, धुलंडी कल:महिलाओं के लिए रोडवेज यात्रा फ्री, जानिए शुभ मुहूर्त और संयोग

टोंक में दो दिवसीय होली पर्व सोमवार से शुरू हो गया है। आज फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार को धुलंडी मनाई जाएगी। इस बार होलिका दहन विशेष ज्योतिषीय योग-संयोग में होगा। राज्य सरकार ने दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। साथ ही महिलाओं के लिए आज और कल रोडवेज बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा रहेगी। रंग-गुलाल और पिचकारियों से सजे बाजार होली के उत्साह के बीच शहर के बाजार रंग, गुलाल, पिचकारी और सजावटी सामग्री से सजे नजर आए। पिछले दो दिनों से खरीदारी का दौर तेज है। बच्चे रंग-बिरंगी पिचकारियों और कार्टून कैरेक्टर वाली गनों की मांग कर रहे हैं, वहीं युवा हर्बल गुलाल और नए डिजाइन के रंगों की खरीदारी में जुटे हैं। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी रौनक से बाजार में अच्छी चहल-पहल बनी हुई है। प्रदोष काल में होगा होलिका दहन मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री के अनुसार शास्त्रों में होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के प्रदोष काल में, भद्रा रहित समय में करना श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी 2 मार्च को शाम 5:56 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में पूर्णिमा विद्यमान रहेगी, इसलिए 2 मार्च, सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा। शास्त्री के अनुसार शाम 6:24 बजे से 6:36 बजे के बीच 12 मिनट का समय होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ रहेगा। हालांकि भद्रा शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सूर्योदय से पूर्व 5:28 बजे तक रहेगी, जिसे अशुभ माना जाता है। भद्रा पुच्छ मध्यरात्रि 1:26 बजे से 2:38 बजे तक रहेगा। इस अवधि में परंपरा अनुसार दहन किया जा सकता है। भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है। चंद्र ग्रहण का भी विशेष संयोग इस वर्ष होली के साथ चंद्र ग्रहण का भी संयोग बन रहा है। 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:48 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। चंद्रमा का उदय शाम 6:29 बजे होगा। ग्रहण का सुतक सुबह 6:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि भद्रा निशीथ काल से आगे तक बनी रहे तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ या प्रदोष काल में ही होलिका दहन करना चाहिए। इस बार भद्रा और भद्रा पुच्छ दोनों ही निशीथ काल के बाद तक प्रभावी हैं, इसलिए निर्धारित शुभ समय में ही दहन करना उचित रहेगा।

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