मंडी में आज मनाई जाएगी होली:सेरी मंच पर हजारों लोग एक-दूसरे को लगाएंगे गुलाल, प्रशासन ने किए खास इंतजाम

हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में होली पर्व को आज हर्षोल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। ऐतिहासिक सेरी मंच पर आज सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक हजारों लोग एकत्रित होकर गुलाल उड़ाएंगे और सामूहिक रूप से रंगोत्सव का आनंद लेंगे। पर्व के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं। मंडी की होली अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण प्रदेशभर में अलग पहचान रखती है। यहां बिना परिचय के किसी को रंग नहीं लगाया जाता और न ही जबरन रंग डालने की परंपरा है। आपसी सम्मान और मर्यादा पर आधारित यह परंपरा मंडी की होली को अन्य स्थानों से विशिष्ट बनाती है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लोग सेरी मंच पर एकत्र होकर सामूहिक रूप से इस उत्सव को मनाते हैं। भगवान शिव और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा होगी इतिहासकार डॉ. दिनेश धर्मपाल के अनुसार, मंडी शैव और वैष्णव परंपरा का अद्वितीय संगम है, जहां भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष रूप से आराधना की जाती है। होली के अवसर पर माधव राय मंदिर परिसर में पीतल के विशाल पात्रों में रंग तैयार किए जाते हैं। मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा अपने दरबारियों के साथ यहां होली खेलते थे और घोड़े पर सवार होकर प्रजा के बीच पहुंचते थे। यह ऐतिहासिक परंपरा आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। शाम को माधोराय की जलेब के साथ होली उत्सव समापन होगा शाम के समय ‘माधोराय की जलेब’ निकलने के साथ ही होली उत्सव का समापन होता है। इस दौरान अबीर-गुलाल के साथ प्राकृतिक रंगों का विशेष उपयोग किया जाता है। चीड़ और देवदार से प्राप्त पीले पदार्थ ‘पठावा’ से देवताओं का तिलक किया जाता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं चावल के आटे से पारंपरिक व्यंजन ‘चिलहडू’ तैयार करती हैं, जिसे दूध और घी के साथ परोसा जाता है। परंपरा, आस्था और आपसी सौहार्द का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती मंडी की होली हर वर्ष की भांति इस बार भी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का संदेश देगी।

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