रायपुर में 200 सालों से होलिका के प्रेमी की पूजा:इलोजी की निकलती है बारात, निसंतान महिलाएं मांगती हैं संतान प्राप्ति की मन्नत

रायपुर में होलिका दहन के दिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। करीब 200 सालों से एक खास देवता की पूजा की जाती है। यह पूजा सेठ नाथूराम के नाम से होती है, जिन्हें सदर बाजार क्षेत्र के व्यापारी वर्ग के लोग श्रद्धा से मानते हैं। सदर बाजार इलाके में रहने वाले व्यापारियों के अनुसार, यह परंपरा दो शताब्दियों से भी अधिक समय से चली आ रही है। हर साल होलिका दहन के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि सेठ नाथूराम के रूप में होलिका के प्रेमी इलोजी की पूजा होती है। इलोजी को प्रेम का देवता भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि निसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए इनकी पूजा करती हैं। राजस्थान के कई शहरों और गांवों में आज भी लोग इलोजी की पूजा करते हैं। क्यों की जाती है इलोजी की पूजा, और क्या है इसकी मान्यता और परंपरा पढ़िए इस रिपोर्ट में:- 200 साल पुरानी पूजा परंपरा की शुरुआत सराफा एसोसिएशन से जुड़े कारोबारी हरख मालू ने बताया कि 200 साल पहले रायपुर के सराफा व्यापारियों ने मिलकर नाथूराम (इलोजी) की पूजा परंपरा की शुरुआत की थी, जो अब भी जारी है। ऐसा माना जाता है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका की शादी पहले इलोजी से ही होने वाली थी। दोनों के बीच बेहद प्यार था। लेकिन हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद के विष्णु भक्ति से तंग आकर उसकी हत्या करने की सोची। होलिका को अग्नि का वरदान प्राप्त था, यानी कि अगर वह आग में भी कूदे तो वह जलती नहीं। होलिका की मौत से हुए थे दुखी दूसरी तरफ जब होलिका की मौत की खबर इलोजी ने सुनी तो वो बेहद दुखी हुए। वह दूल्हे के वेश में बारात लेकर होलिका से विवाह करने निकल चुके थे, तभी उन्हें होलिका की मौत की खबर मिली। इसके बाद गम में डूबे इलोजी होलिका के पास पहुंचते हैं और शव को देखकर जमकर विलाप करते हैं। माना जाता है कि इलोजी ने होलिका की राख को अपने शरीर पर मलकर अपना प्यार जताया था। साथ ही ताउम्र शादी नहीं की और होलिका की याद में जीवन बिताया। होली जलने के दूसरे दिन धूल भरी होली के रूप में लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। निसंतान दंपति की गहरी आस्था यही वजह है कि नाथूराम या इलोजी की दूल्हे के स्वरूप पर प्रतिमा स्थापित करके पूजा की जाती है। इलोजी को प्रेम का देवता भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि निसंतान महिलाएं संतान की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा करती हैं। राजस्थान की लोक कथाओं में इलोजी मजाकिया देवता के तौर पर भी देखे जाते हैं। होलियाना माहौल में आपस में महिलाएं और पुरुष एक दूसरे को छेड़ने के लिए इलोजी से जुड़ी कई कहावतें भी कहते हैं। राजस्थान के हैं लोक देवता राजस्थान के कई शहरों और गांवों में आज भी लोकदेवता इलोजी की पूजा की जाती है। होलिका की मौत के बाद इलोजी की प्रेम कहानी अधूरी रही। हालांकि इलोजी ने फिर कभी शादी नहीं की और ये प्रेम कहानी अमर हो गई। इतना ही नहीं राजस्थान के कई क्षेत्रों में आज भी इलोजी की पूजा होती है। वहां की पाली में इलोजी का मंदिर भी है। होली से पहले कई इलाकों में इलोजी की प्रतिमा स्थापित करके पूजा पाठ की जाती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सदर बाजार में यही परंपरा कई सालों से चल रही है। धूमधाम से निकाली जाती है बारात रायपुर में होली जैसे ही करीब आती है। सेठ नाथूराम की चर्चा शुरू हो जाती है। एकादशी से शुरू होकर यह आयोजन पूर्णिमा तक चलता है। इस दौरान पूजा अर्चना के साथ बारात निकाली जाती है। होलिका दहन के दिन जिस तरह बारात में मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था होती है, ठीक उसी तरह से तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिसे लोग प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परम्परा इस परंपरा की शुरुआत नाहटा मार्केट और नाहटा परिवार ने की थी। सेठ नाथूराम की यहां 2 प्रतिमाएं हैं। एक प्रतिमा 200 साल पुरानी है और दूसरी करीब 50 साल पुरानी है। इसकी पूरी व्यवस्था शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज और पुष्टिकर समाज के साथ रायपुर सर्राफा एसोसिएशन की ओर से की जाती है। इस कार्यक्रम में अन्य समाज के लोग भी बड़ी संख्या में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। ……………………….. होली से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… केमिकल वाले रंग बिगाड़ सकते हैं आपका त्योहार:डिटर्जेंट से नहीं छूटता कलर, चेहरे के लिए बेसन-दही वाला नुस्खा बेस्ट; बीपी-शुगर वाले संभलकर खेलें होली होलिका दहन के साथ ही पूरे राज्य में होली सेलिब्रेशन की शुरूआत हो जाएगी। इस दौरान अतिरिक्त उत्साह में कई दफा आप केमिकल रंगों का उपयोग करते हैं, ये खतरनाक है। होली तो खूब मजे से खेलते हैं, लेकिन रंग निकालने की हड़बड़ी में अपनी ही बॉडी पर कई तरह के प्रयोग करने लगते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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