करौली जिले में सपोटरा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विधायक हंसराज मीणा और पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा भ्रष्टाचार, भूमि आवंटन, मनरेगा कार्यों और विकास योजनाओं की स्थिति को लेकर आमने-सामने हैं।
दोनों नेताओं के बयानों से सियासी माहौल गरमा गया है, वहीं संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधायक हंसराज मीणा ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री के पंचायत राज मंत्री रहते हुए सवा चार बीघा भूमि नियमों का उल्लंघन कर उनके परिजनों को आवंटित की गई थी। विधायक ने बताया कि वर्तमान सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है, जिसके बाद कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और मामला एसीबी में दर्ज है। विधायक के अनुसार, पट्टा निरस्तीकरण की प्रक्रिया कोर्ट में विचाराधीन है। ‘भ्रष्टाचार को सदन में उठाना जनप्रतिनिधि का दायित्व’
इसके अलावा विधायक ने नानपुर पंचायत में मनरेगा कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विधानसभा में उठाया गया था, जिसके बाद जांच के आदेश जारी हुए और विभागीय कार्रवाई चल रही है। मीणा ने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार को सदन में उठाना जनप्रतिनिधि का दायित्व है। विधायक ने आरोपों को बताया निराधार
विधायक ने हरिलाल मीणा की मृत्यु से जुड़े मामले में अपने परिवार पर लगे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने इस घटना को दुखद बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। विधायक ने स्टांप पेपर से संबंधित दस्तावेजों की एफएसएल जांच कराने पर जोर दिया, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष को जल्दबाजी में दोषी न ठहराया जाए। पूर्व मंत्री पर विधायक ने बोला हमला
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री के कार्यकाल के दौरान पंचायत समिति के माध्यम से राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की राशि से नगर पालिका क्षेत्र में कई कार्य स्वीकृत किए गए थे। हालांकि, उनका कहना है कि इनमें से अनेक कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देते। उन्होंने विभिन्न स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच की मांग की।


