अबोहर में 35 वर्षों से होलिका दहन की परंपरा:40 फुट ऊंची लपटें देती हैं प्रह्लाद की भक्ति का संदेश

फाजिल्का जिले के अबोहर में होली से पहले पिछले 35 सालों से श्री सनातन धर्म सभा द्वारा होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस साल भी यह कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक मनाया गया, जिसमें 40 फुट तक ऊंची लपटें प्रह्लाद की भक्ति का संदेश देती हैं। श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान राम प्रकाश मित्तल ने बताया कि अबोहर में होलिका दहन की यह परंपरा पिछले 35 सालों से निरंतर चली आ रही है। यह आयोजन शहर की एक महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधि बन चुका है। पूजन में महिलाएं होती हैं शामिल होलिका दहन के दिन सुबह सवा 9 बजे पूजन शुरू होता है, जो पूरे दिन चलता है। इस पूजन में शहर की बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होती हैं। वे अपने बच्चों और परिवार की रक्षा के लिए व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। घरों से उपले-लकड़ियां लाते हैं लोग इस अवसर पर लोग अपने घरों से जलाने के लिए उपले, लकड़ियां और अन्य धार्मिक सामग्री लाते हैं, जिससे होलिका की ऊंचाई लगभग 20 फुट तक पहुंच जाती है। 40 फुट तक उठने वाली अग्नि की लपटें यह संदेश देती हैं कि किस प्रकार बुराई की प्रतीक होलिका वरदान के बावजूद अग्नि में भस्म हो गई, जबकि प्रभु विष्णु के भक्त प्रह्लाद सुरक्षित रहे।

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