2014 में दिनेश ने शुरू की साइ​क्लिंग:12 भाई-बहनों समेत पांचू के 18 साइक्लिस्टों ने बनाई खेल में पहचान

पांचू के पन्नाराम तर्ड के परिवार की आज समाज ही नहीं देश में अलग की पहचान है। यह पहचान उनके पोते-पोतियों में साइ​क्लिंग द्वारा कमाई है। इन भाई-बहनों ने साइ​क्लिंग में नेशनल और इंटरनेशनल तक पहचान बनाई है। इन 12 भाई-ब​हनों में पांच तो सगे भाई है। इन्होंने खेल के जरिये न केवल नेशनल गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीते बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। साइक्लिंग के माध्यम से ही इनमें से कोई आर्मी तक पहुंचा तो कोई रेलवे में। इनमें से दो भाई को भारतीय टीम की ओर से भी खेले। इन्हें साइक्लिंग में इतना नाम कमाते देख गांव के छह युवाओं ने भी साइक्लिंग प्रतियोगिताओं में भाग्य आजमाया। गांव के 18 खिलाड़ियों में आठ महिला खिलाड़ी और 10 पुरूष साइक्लिस्ट है। गांव के दिनेश तर्ड ने 2014 में बीकानेर में साइक्लिंग शुरू की। कुछ समय ट्रेनिंग लेने के बाद अगले ही साल हुई साइक्लिंग नेशनल प्रतियोगिता में दिनेश ने पदक जीता। सुरेश, मनोज, राजूराम और ब्रिमेश ने भी साइक्लिंग शुरू कर दी। अब तक ​दिनेश ने 15 नेशनल पदक जीत लिए, इनमें तीन गोल्ड है। इसके अलावा एशिया पर में एक सिल्वर और ब्रांच मेडल भी अपनी झाेली में डाले। आर्मी टीम का हिस्सा रहे 5 साल तक, अब कर रहे कोचिंग आर्मी की साइक्लिंग टीम के कोच राजूराम तर्ड बताते हैं कि उन्हाेंने पांच साल तक आर्मी टीम का प्रतिनिधित्व किया है। 11 खिलाड़ियों की टीम ने उनकी भूमिका अहम रहती। आर्मी की सातों कमांडो के बीच हुए कंपीटिशन के बाद उनका चयन नेशनल टीम में हुआ। उनके साथ दो अन्य खिलाड़ी भी नेशनल टीम में चुने गए। उस समय उन्होंने वेस्टर्न आर्मी कमांड, चंडीगढ़ में इंटर आर्मी में पदक जीता। अब बीकानेर में साउथ-वेस्टर्न कमांड में कोच की भूमिका में है। 10 लड़के और 8 महिला खिलाड़ी पांचू के तर्ड परिवार ने साइक्लिंग में 12 नेशनल खिलाड़ी दिए हैं। इनमें से दो भाइयों ने अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं। तर्ड परिवार के ब्रिमेश, राजूराम, दिनेश, सुरेश और मनोज तर्ड को सगे भाई है। इनमें दिनेश और मनोज ने अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेल हैं। वहीं राजूराम आर्मी में साइक्लिंग खिलाड़ी और कोच है। इसके अलावा इसी परिवार की पांच बेटियों ने भी साइक्लिंग में नेशनल मेडल जीते हुए हैं। इसी परिवार की शारदा तर्ड़, सरोज और आरती के अलावा प्रियंका और निरमा तर्ड ने भी साइक्लिंग में नेशनल पदक जीते हैं। इसी परिवार के ओमप्रकाश और बीरबल के अलावा गांव की आरती सियाग, पुष्पा सियाग, संतोष सियाग, रामकिशन भांभू, मनोज डूडी और भगवती मायला ने साइक्लिंग प्रतियोगिता में पदक जीते हैं। भगवती से ताे स्कूली खेलों में ही नेशनल पदक जीत लिया। मलेशिया में हुई ट्रेक साइक्लिंग में भी एकेडमी की खिलाड़ी ने जीता है पदक पांचू में एक ही परिवार के 12 खिलाड़ियाें को पदकवीर बनाने वाली गुरूदेव साइक्लिंग एकेडमी की एक महिला खिलाड़ी ने 21 से 27 फरवरी तक मलेशिया के निलाई शहर में हुई एशियन ट्रैक साइक्लिंग में टीम इंवेंट में कांस्य पदक जीता है। एकेडमी के अंतरराष्ट्रीय कोच किशन पुरोहित बताते हैं कि हमारी एकेडमी ने इन दिनों 150 खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं। भारतीय साइक्लिंग टीम में अधिकांश खिलाड़ी बीकानेर में ही तैयार होते हैं। अब तक हमने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। हमने अ​भी तक 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। इसमें कोरोना कॉल के बाद 20 से ज्यादा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं।

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