गुरदासपुर रणजीत सिंह एनकाउंटर पर कोर्ट का आदेश:पुलिस अधिकारियों के CDR सुरक्षित रखने को कहा, एम्स में पोस्टमार्टम की मांग खारिज

गुरदासपुर के बहुचर्चित रणजीत सिंह एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। गुरदासपुर की सीजीएम अदालत ने टेलीकॉम कंपनियों को पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। यह निर्देश 20 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक की अवधि के लिए जारी किया गया है। कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आदियां पुलिस चौकी में दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने रणजीत सिंह को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। रणजीत सिंह की मां ने इसे फेक बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ये अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एम्स में पोस्टमार्टम की मांग खारिज हालांकि, अदालत ने रणजीत सिंह के शव का पोस्टमार्टम पीजीआई या एम्स से कराने की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मांग उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और यह केवल माननीय उच्च न्यायालय का विषय है। परिजनों की मांग के चलते 9 दिन से शव अस्पताल में पड़ा है। इसलिए तुरंत पोस्टमार्टम कराने को कहा है। इस संबंध में एसएमओ रविंदर सिंह से बात करने पर उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत के आदेशों के अनुसार डॉक्टरों का बोर्ड बना लिया गया है और पोस्टमार्टम संबंधी प्रबंध कर लिए गए हैं। रणजीत सिंह की कानूनी टीम में एडवोकेट अजे मरवाह (सुप्रीम कोर्ट), एडवोकेट रविदीप बडियाल (सुप्रीम कोर्ट और जिला अदालतें, गुरदासपुर) और एडवोकेट भजनप्रीत सिंह (जिला अदालतें, गुरदासपुर) शामिल हैं। जानिए कोर्ट ने क्या आदेश दिए मुठभेड़ संबंधित फाइल तुरंत कोर्ट में पेश करें:
न्यायाधीश सुरेखा डडवाल ने अपने आदेश में पुराना शाला पुलिस थाने के एसएचओ को रणजीत सिंह के पुलिस मुठभेड़ से संबंधित केस फाइल तुरंत अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मारे गए रणजीत सिंह की कॉल डिटेल और लोकेशन भी सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है। बोर्ड से पोस्टमार्टम, वीडियोग्राफी भी कराएं:
अदालत ने कहा कि शव कई दिनों से सिविल अस्पताल में पड़ा है, इसलिए तुरंत पोस्टमार्टम कराना आवश्यक है। सीजीएम ने सिविल अस्पताल के एसएमओ को तत्काल डॉक्टरों का एक बोर्ड गठित कर आज ही पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया। पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच:
इससे पहले ड्यूटी मजिस्ट्रेट निर्मला देवी की अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिए हैं कि एसएसपी गुरदासपुर, एसएचओ दोरांगला व पुराना शाला, सीआईए इंचार्ज गुरमीत सिंह व मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिस अधिकारियों तथा मृतक रणजीत सिंह के फोन नंबरों की डिटेल जांच अधिकारी को दी जाए। टेलीकॉम कंपनियों को भी निर्देश:
टेलीकॉम कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडरों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिकारियों की 20 फरवरी से लेकर 28 फरवरी 2026 तक की कॉल डिटेल सुरक्षित रखी जाए। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों की सीजीएम लोकेशन भी सुरक्षित रखने को कहा गया है। जज की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि घटना स्थल के नजदीक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी सुरक्षित रखी जाए और इसे जांच का हिस्सा बनाया जाए। परिजनों का आरोप: हिरासत में मौत, मुठभेड़ झूठी मृतक रणजीत सिंह के परिवार वालों का आरोप है कि रणजीत सिंह को झूठा मुठभेड़ बनाकर मारा गया है और उसकी मौत पुलिस हिरासत में ही हो गई थी। परिवार वाले रणजीत सिंह का पोस्टमार्टम पीजीआई या एम्स में करवाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसलिए मृतक रणजीत सिंह का शव पिछले 9 दिनों से सिविल अस्पताल में पड़ा हुआ है।

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