सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर करीब 13 ब्रिज का निर्माण होना है। इसमें से करीब पांच रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) हैं। सिंहस्थ में बनने वाले 6 ब्रिज तो अभी स्वीकृति में ही उलझे हैं, जो भोपाल में ही अटके हैं यानी चुनौतियां कम नहीं है।
13 ब्रिज को पूरा करने के लिए 34 माह यानी करीब तीन साल के टारगेट के बीच में बड़नगर रोड पर 2016 के बाद से मुल्लापुरा मोहनपुरा में ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, जो कि अब तक अधूरा है। अब इसे जून-2025 तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। गुजरात की अजय इन्फोटेक निर्माण कार्य छोड़कर चली गई। इसका ठेका समाप्त किया जाकर उसी के हर्जे खर्चे पर नया ठेका किया गया है। नई कंपनी ने अब काम शुरू कर दिया है। इसी ब्रिज के समानांतर नया आरओबी बनाया जाना है। केंद्रीय निधि से बनाए जा रही यंत्रमहल मार्ग से शंकराचार्य चौराहा से बड़नगर रोड पर चंदूखेड़ी तक 225 करोड़ की लागत से बनाई जाने वाली 14 किमी लंबी सड़क पर तीन ब्रिज बनाए जाना है। इसमें अभी पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के बीच में कुछ तय नहीं हो पाया है। सिंहस्थ-2016 से प्रस्तावित फ्रीगंज ब्रिज के समानांतर नए ब्रिज का निर्माण करने वाली कंपनी ठेका लेने के बाद काम छोड़कर चली गई। उसने सेतु निगम के साथ में एग्रीमेंट तक नहीं किया। इसके पीछे जो कारण सामने आया है, उसमें ठेका कंपनी शहरी क्षेत्र में निर्माण के दौरान आने वाली बाधाएं बताई जा रही है। उक्त कंपनी के जाने के बाद सेतु निगम की ओर से नया टेंडर किया गया है, जो कि 10 मार्च को खोला जाएगा। देवास रोड पर लालपुर ब्रिज का निर्माण भी अभी 50 प्रतिशत तक ही पूरा हो पाया है। ब्रिज की चौड़ाई 12 मीटर से बढ़ाकर 21.40 मीटर की
सेतु निगम की ओर से फ्रीगंज के नए ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाई है। पहले इस ब्रिज की चौड़ाई 12 मीटर निर्धारित की गई थी, जिसे बढ़ाकर बाद में 15 मीटर किया और अब 70 फीट यानी 21.40 मीटर चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। ब्रिज के निर्माण क्षेत्र में रेलवे के पांच क्वार्टर भी आ रहे हैं, जिन्हें तोड़ा जाना है। इसकी भी रेलवे से स्वीकृति जारी होने के बाद इन्हें हटाया जाएगा। साइड क्लियर के बाद आगे का कार्य हो सकेगा। ब्रिज में डिवाइडर बनाया जाएगा, जिससे वन-वे सिस्टम लागू हो जाएगा। 27-27 फीट यानी 8-9 मीटर की सड़क निर्माण किया जाएगा। ब्रिज की एक ब्रांच चामुंडा माता चौराहा की तरफ तो दूसरी फ्रीगंज की तरफ दो तथा एक भुजा मक्सी रोड की तरफ होगी। कार्य पूर्ण करने का 31 दिसंबर 2027 का टारगेट
सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में करीब 13 नए ब्रिज का निर्माण होना है। सिंहस्थ से जुड़े 27 बड़े प्रोजेक्ट्स में यह ब्रिज शामिल हैं। भीड़ और आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखकर 5 आरओबी होंगे तो शिप्रा नदी पर 8 ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण कार्य को पूर्ण करने का टारगेट 31 दिसंबर-2027 रखा गया है। यानी 34 माह में ब्रिज के निर्माण कार्य पूरे किए जाना है, ताकि सिंहस्थ में साधु-संतों व श्रद्धालुओं को आवागमन में आसानी हो सके। शाही स्नान के दिन करीब तीन करोड़ व पूरे सिंहस्थ अवधि में करीब 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना के चलते 13 नए ब्रिज बनाए जाएंगे। यह भी अड़चनें…साइड क्लियर के साथ जमीन अधिग्रहण टारगेट के तहत ब्रिज के निर्माण हो जाएंगे- ईई
^ब्रिज की स्वीकृति के बाद निर्माण के टेंडर कर कार्य शुरू करवाए जा रहे हैं। टारगेट के तहत सिंहस्थ के सभी ब्रिज का निर्माण पूरा किया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना पर ही कार्य किया जा रहा है।
– पीएस पंत, ईई सेतु निगम ब्रिज में रेलवे के हिस्से में अप्रूवल होने में लगता है टाइम, ड्राइंग मंजूर होना भी महत्वपूर्ण है एक्सपर्ट व्यू – शोभा खन्ना, सेवानिवृत्त ईई सेतु रेलवे के साथ के जो ब्रिज होते हैं, रेलवे अपने हिस्से में अप्रूवल देता है, जिसमें टाइम लगता है। रेलवे की मंजूरी होना आवश्यक है। ड्राइंग मंजूर होना महत्वपूर्ण है। इसमें यह भी फाइनल होना चाहिए कि पटरियों के ऊपर के हिस्से का निर्माण रेलवे करेगा या सेतु निगम को करना है। यह तय हो जाने के बाद काम में आसानी होती है।


