प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौटे प्रदेश के अधिकारी अब सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में जुट गए हैं। मध्यप्रदेश के करीब आधा दर्जन अधिकारी तीन चरणों में महाकुंभ मैनेजमेंट की जानकारी लेने पहुंचे थे। प्रयागराज पहुंचे अधिकारियों ने मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस और रेस्क्यू के लिए ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा है। महाकाल की नगरी उज्जैन में तीन साल बाद 2028 में शिप्रा नदी पर सिंहस्थ कुम्भ मेले का आयोजन होगा। सिंहस्थ कुंभ मेला 27 मार्च 2028 से 27 मई 2028 तक है। इस दौरान 9 अप्रैल से 8 मई की तारीखों के बीच 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान प्रस्तावित हैं। कुंभ मेले में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। दो महीने लंबे इस पर्व का आयोजन करने में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इससे पहले साल 2016 में सिंहस्थ का आयोजन हुआ था। जिसमें, करीब सात करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी। इस बार शाही स्नान में करीब 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए अधिकारी अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। ताकि सामान्य दिनों व पर्वों पर भी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकें। सूत्रों के मुताबिक सिंहस्थ कुंभ में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी तक ज्यादा पैदल न चलना पड़े इस देखते हुए सभी पार्किंग और व्यवस्थाएं बनाई जा जाएंगी। सीएम से लेकर एसीएस तक ले चुके हैं बैठक सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में 3 हजार करोड़ से अधिक के काम चल रहे है। इसके साथ ही करीब 1500 करोड़ के कार्य प्रस्तावित भी है। जिन्हें 2028 से पहले करने का लक्ष्य रखा गया है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 29 किलोमीटर तक नए घाटों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। उज्जैन कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर कई बैठकों का दौर हो चुका है। सीएम से लेकर एसीएस स्तर के अधिकारी खुद उज्जैन पहुंचकर कुम्भ को लेकर चल रहे कार्यों और प्रस्तावित कार्य की जानकारी ले चुके है। 2 फरवरी को अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने उज्जैन संभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुके हैं। तैयारी बैठकों में एसीएस ने कुंभ मेले में आग, भगदड़, डूबने या किसी भी आपदा से निपटने के लिए पुख्ता प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियो को दिए है। एसीएस राजौरा ने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी घटना से निपटने के लिए ऐसे तैयारी हो कि अधिकतम रिस्पांस टाइम 15 मिनट का रहे। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि… सिंहस्थ कुम्भ दो माह तक चलेगा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 42 हजार से अधिक जवान कुम्भ मेले के दौरान तैनात रहेंगे। इसके साथ दो नए थाने महाकाल लोक और तपोभूमि पर बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ जगह-जगह छोटी-छोटी चौकियां बनाकर सुरक्षा रखी जाएगी। पिछले कुंभ मेलों का होगा अध्ययन अखाड़ों, साधु-संतों के लिए आवंटित स्थान के अनुसार ही मेपिंग की जाएगी। उनका स्थान निश्चित किया जाएघा। सिंहस्थ के पूर्व ही बोर्डिंग की व्यवस्था की जाएगी। विगत सिंहस्थ 2004, 2016 में जो व्यवस्थाएं की गई थी उसका भी अध्ययन किया जाए। सबसे अधिक ट्रेनों से आएगी आम जनता सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि सिंहस्थ की सभी योजनाओं को साधु-संतों से चर्चा कर अंतिम रूप दिया जाए। डिजिटल सूचना प्रसारण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और वीएमएस डिस्प्ले सिस्टम से श्रद्धालुओं को हर जरूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। इसके अलावा, फायर फाइटिंग सिस्टम, मॉक ड्रिल और हेल्पलाइन सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा। मेला क्षेत्र में दो नए पुलिस थाने और अस्थाई चौकियां स्थापित की जाएंगी। बड़ी संख्या में कुंभ में शामिल होने आम जनता ट्रेनों के माध्यम से उज्जैन पहुंचेगी। उज्जैन पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं को काम समय में शिप्रा स्नान हो सके इसकी विशेष व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक की है। बैठक में तय किया गया कि सभी स्थायी निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूरे किए जाएंगे। इसमें संतों और अखाड़ों के लिए स्थान आवंटन, सड़कों और पुलों का निर्माण, जल आपूर्ति नेटवर्क और सीवरेज व्यवस्था जैसी सुविधा शामिल है। क्राउड मैनेजमेंट पर फोकस सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। इस दौरान उज्जैन में सैटेलाइट रेलवे स्टेशनों का विकास किया जाएगा। जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। क्षिप्रा नदी पर नए पुलों के साथ एनएचएआई (NHAI) द्वारा नए मार्गों का प्रस्ताव रखा गया है। भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रणनीति अपनाई है। शाही स्नान के दौरान अधिकतम 15 मिनट दिए जाने का फैसला लिया गया है। 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे सिंहस्थ कुम्भ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसे देखते हुए प्रत्येक दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50,000 बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सार्वजनिक शौचालयों की मैपिंग और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की रहेंगे तैनात सड़क एवं अन्य सफाई कर्मियों को मिलाकर कुल 11 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा कचरा संग्रहण के लिए लगभग से 5 हजार सफाई कर्मियों की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। पीक लोड पर सॉलिड वेस्ट उत्पादन लगभग 577 एमएलडी होगा। इसके लिए 379 कचरा गाड़ियों की आवश्यकता होगी। जो मेला क्षेत्र से कचरा उठाने का काम करेगी। 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 झोन में बांटा जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। सिंहस्थ के गर्मी के मौसम में आयोजन को देखते हुए इलेक्ट्रोलाइट की उपलब्धता समस्त मेला क्षेत्र में जगह-जगह की जाएगी। उज्जैन में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। इसकी लागत कुल 592.3 करोड़ रुपए है। जिसका कुल क्षेत्रफल 1, 42, 034.06 स्के. मीटर है। इसमें 550 बिस्तर की क्षमता होगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपदा की स्थिति में कार्ययोजना स्टेट यूनिट के साथ मिलकर बनाई जायेगी। जिसमें मेले के दौरान बर्न यूनिट, एम्बुलेंस की सुविधा, ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर आदि की पूरी तैयारी 24×7 रखने के निर्णय लिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग का विशेष ध्यान हैजा और अन्य मौसम जनित बीमारियों और आपदा प्रबंधन के रिस्पांस पर रहेगा। 3 हजार करोड़ से अधिक से सड़कों का बिछ रहा है जाल कुम्भ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इंदौर रोड की ओर से उज्जैन में प्रवेश करेंगे। इसके लिए मौजूदा फोर लेन को सिक्स लेन में बदला जा रहा है। इसके लिए एमपीआरडीसी 1672 करोड़ की 6 लेन बना रही है। उज्जैन के सिंहस्थ बायपास से इंदौर के हातोद क्षेत्र तक नई बनने वाली 48 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 1370 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। खास बात ये है कि ये सड़क दोनों जिलों के 29 गांवों से होकर गुजरेगी। इसमें 20 गांव इंदौर जिले के हैं, जबकि 9 गांव उज्जैन जिले के होंगे। मेले के लिए ऑल इन वन एप बनेगा मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के निर्देशानुसार सिंहस्थ में फेस रिकग्निशन, अलर्ट सिस्टम, फायर अलार्म के सभी सॉफ्टवेयर एमपीएसईडीसी के द्वारा विकसित किए जाएंगे। यह काम 31 दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा सिंहस्थ-2028 के लिए ऑल इन वन ऐप भी बनाया जाएगा। जिसमें ड्रोन सर्विस, ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट के जानकारी की सुविधा मिल सकेगी। सिंहस्थ में वाहनों की पार्किंग की उपलब्धता के लिए ऑनलाइन डेटा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जीआईएस आधारित सिस्टम बनाया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र का वर्चुअल टूर ऐप के माध्यम से कराया जाएगा। उज्जैन में होंगे ये स्थायी निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आश्रम, पार्किंग, धर्मशाला, भोजनशाला, प्रवचन हॉल, सीवरेज लाईन, रोड़, वाटर सप्लाई, मेडिसिटी, ब्रिज, सड़कों के कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना की लागत लगभग 919.94 करोड़ रूपए है। क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए नदी पर बैराजों की श्रंखला का निर्माण किया जा रहा है। सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रख 778.91 करोड़ रुपए की लागत से 29 घाटों का निर्माण किया जाएगा। देवास, इंदौर और उज्जैन में बैराजों की श्रंखला बनाई जाएगी। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना इसे मई 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। 860 करोड़ रुपए की लागत से हरियाखेड़ी परियोजना पर 100 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना का विकास भी किया जा रहा है। उज्जैन शहर की जनसंख्या लगभग 7.2 लाख है। इसमें प्रतिदिन पेयजल की मांग 178.28 एमएलडी है। प्रस्तावित सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना से 51 एमसीएम, नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से 58.34 एमसीएम पेयजल की सप्लाई की जा सकेगी। इसके अलावा न्यू अंबोदिया की 68 एमएलडी पेयजल क्षमता की परियोजना प्रस्तावित है। आपदा प्रबंधन के लिए मेला क्षेत्र में डाली जाएगी पाइपलाइन अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के मुताबिक भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ आपदा प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए की शाही स्नान वाले दिनों में आपदा प्रबंधन के लिए अधिकतम रिस्पांस समय 15 मिनट रहे। इसके लिए लगातार मॉक ड्रिल करें और कार्य योजना बनाएं, आग लगने की घटनाओं को तत्काल रूप से रोकने के लिए मेला क्षेत्र में पाइपलाइन भी डालें और यह सुनिश्चित करें कि छोटे फायर फाइटर वहां जल्दी पहुंच सकें। इसी के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी अलग-अलग जगह ट्रॉमा सेंटर बनाकर तत्काल कार्रवाई के करने की योजना अनुसार काम हो। बनेगी नई कुम्भ नगरी सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में जल्द ही एक नई कुंभ नगरी बसने जा रही है। जिसमें इंटर कनेक्टेड चौड़ी सड़कें, डिवाइडर, अंडर ग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होंगी। खास बात ये है कि ये सभी निर्माण स्थायी होंगे। यानी कुंभ के बाद इन्हें तोड़ा नहीं जाएगा। लैंड पुलिंग से करीब 2378 हेक्टेयर जमीन पर उज्जैन विकास प्राधिकरण नई कुंभ नगरी बसाएगा। मध्य प्रदेश में इस तरह की यह पहली योजना है। जिस पर करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। दरअसल, सिंहस्थ-2028 को लेकर सरकार ने इस बार सिंहस्थ मेला क्षेत्र को स्थायी रूप से विकसित करने का प्लान तैयार किया है। जिससे हर 12 साल में सिंहस्थ की तैयारियों पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए बचेंगे। इन मंदिरों में भी होंगे कार्य श्रीकृष्ण पाथेय न्यास अंतर्गत नारायणा धाम के श्रीकृष्ण सुदामा मंदिर के विकास, श्री महाकाल लोक की मूर्तियों के नीचे पौराणिक कथाओं का वर्णन, क्यूआर कोड से स्केन कर ऑडियो गाइड की सुविधा, श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्टोन क्लेडिंग और न्यू वेटिंग हॉल, आपातकालीन निर्गम, पालकी हॉल, मार्बल क्लेडिंग और फ्लोरिंग के कार्य, विजिटर फेसिलिटेशन सेंटर और श्री महाकालेश्वर भक्त निवास निर्माण कार्य किये जाएंगे। उज्जैन की क्षिप्रा नदी के किनारे क्षिप्रा पथ बनाया जाएगा। इंदौर उज्जैन के बीच नया ग्रीन फील्ड कॉरिडोर भी बनाया जा रहा है। वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले लगेंगे संभाग आयुक्त संजय गुप्ता ने बताया कि राजस्थान, गुजरात और दक्षिण की ओर से आने वाले यातायात के साथ-साथ मुंबई व दिल्ली से एयरपोर्ट रोड़ को जोड़ने के लिए भी नए रोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। जिनको एनएचएआई के द्वारा बनाया जाएगा। एमपीआरडीसी के द्वारा हरीफाटक तक बनने वाले सिक्स लेन ओवरब्रिज के लिए भी सैद्धांतिक मंजूरी हो गई है। रेलवे की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिए की रेलवे ट्रैक को दोनों ओर से कवर किया जाए। सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनेगा। सिंहस्थ 2028 मेला क्षेत्र एवं शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों, घाटों और रेलवे स्टेशन पर महत्वपूर्ण सूचनाओं तथा संदेशों एवं गुम व्यक्तियों की जानकारी का प्रसारण वीएमडी (वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले) पर किया जाएगा। स्टेशन पर होगा विशेष इंतजाम सिंहस्थ में आए श्रद्धालुओं के लिए वीएमएस पर महाकालेश्वर मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर के दर्शन लगातार स्क्रीन पर भी कराएं जायेंगे। सैटेलाइट स्टेशन पंवासा, मोहनपुरा, विक्रम नगर सेटेलाईट स्टेशन बनेंगे और लालपुल को फ्लेग स्टेशन बनाया जाने का प्रस्ताव है। सदावल हेलीपैड मार्ग पर नवीन थाना बनाया जाएगा। जो सिंहस्थ सिटी पर विशेष ध्यान देगा। इसके अलावा कार्तिक मेला और डेंडिया में यातायात थाने बनाए जाएंगे। मेला क्षेत्र में अस्थाई थानों के साथ हॉस्पिटल एवं फायर स्टेशन के लिए भी स्थान रहेगा। कंट्रोल रूम नृसिंह घाट के स्थान पर पुलिस कंट्रोल रूम बनाए जाए। शहर में 7 पुल और 5 रेलवे ओवर ब्रिज बनेंगे क्षिप्रा नदी पर कुल 7 पुल और 5 रेलवे ओवर ब्रिज स्वीकृत हुए हैं। इनमें हरिफाटक, लालपुल, मुल्लापुरा रोड़ पर क्षिप्रा नदी पुल के समानांतर नवीन टू लेन पुल, हरिफाटक से रिंग रोड़, इंदौर रोड़, भैरवगढ़ पर क्षिप्रा नदी पर पूर्व से निर्मित पुल के समानांतर नवीन टू लेन पुल और तपोभूमि से हामूखेड़ी मार्ग पर क्षिप्रा नदी पर नवीन टू लेन पुल का निर्माण होगा। इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन मार्ग पर शनि मंदिर के पास पुल और क्षिप्रा नदी पर पुल का निर्माण होगा। इसके अलावा 8 पुल और 3 आरओबी अभी स्वीकृत होना बाकी है। प्रयागराज कुम्भ जैसा रेस्क्यू के लिए होगा ड्रोन का उपयोग उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि प्रयागराज कुम्भ मेला अधिकारी और कलेक्टर से मिलकर जानकारी जुटा गई की उन्होंने कब से मेले की व्यवस्था बनानी शुरू की थी। उनकी मेजर प्रायोरिटी क्या-क्या थी। उसकी सूची हम लोगों ने ली है। हमारे यहां जो मेजर प्रायोरिटी है वो प्रयागराज के सिमिलर ही है। पानी, साफ-सफाई शहर का सेनिटेशन शहर की सुंदरता उनकी टाइमलाइन वैसी ही बनाई गई है। उज्जैन कुंभ को देखते हुए हमने 4 साल पहले ही तैयारियां शुरू कर दी। प्रयागराज कुंभ से जो हमने चीज सीखी है। उसमें आईटी का सेटअप किया जाना है। व्हीकल मैनेजमेंट, क्राउड मैनेजमेंट,पार्किंग मैनेजमेंट, क्राउड कैसे डायवर्ट किया गया। इन सभी की स्टडी की गई है। वाटर सप्लाई का जो सिस्टम प्रयागराज में डेवलप किया गया है वह काफी इफेक्टिव है। सेनिटेशन का सिस्टम भी बहुत अच्छा था। शहर को खूबसूरत बनाने पुरे शहर के मुख्य इलाकों में पेंटिंग्स कराई गई। यह सभी चीज हमारे प्लान में भी सम्मिलित हैं। प्रयागराज में रेस्क्यू के सिस्टम में उन्होंने ड्रोन का उपयोग किया था। पूरी मॉनिटरिंग ड्रोन से कर रहे थे। अगर कहीं कोई डूब रहा है तो उसे तुरंत ड्रोन के माध्यम से उसे लाइफ जैकेट पहुंचा दिया जाता था। उनका रेस्क्यू मैनेजमेंट सिस्टम बहुत अच्छा था। वाटर एम्बुलेंस और एयर एम्बुलेंस उज्जैन कुंभ में रहेगा। प्रयागराज में ब्रिज के पास ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए थे। ऐसे उज्जैन में भी बनाया जाएगा। अस्थाई ब्रिज के साथ-साथ स्थाई ब्रिज का भी उपयोग किया जाएगा। रेस्क्यू और वीआईपी मूवमेंट के लिए उनका उपयोग किया जाएगा ताकि आम लोगों को परेशानी ना हो। उज्जैन कुम्भ गर्मियों में आग का खतरा सबसे ज्यादा आईजी उमेश जोगा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में लर्निंग पॉइंट्स के लिए हम लोग तीन चरणों में गए थे। सबसे पहले दिसंबर में डीआईजी, कलेक्टर कमिश्नर सहित अन्य अधिकारी वहां पहुंचे थे। दूसरी बार हम लोग गए। इस दौरान मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस, और रेस्क्यू ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा। पुलिस का प्रशिक्षण कैसा हो यह भी लर्निंग का हमारा पॉइंट था। इसी प्रकार उज्जैन की पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि उज्जैन कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्रयागराज में किस तरह से इंटेलिजेंट का उपयोग किया गया। साइबर टेक्नोलॉजी सहित आधुनिक उपकरणों का उपयोग। प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति अलग है। उज्जैन में काफी हद तक रहवासी इलाके में मेला होगा। जबकि प्रयागराज में पूरा इलाका मैदान नुमा है। रेलवे स्टेशन से आने वाले श्रद्धालुओं और एयरपोर्ट से उज्जैन तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के रास्तों की जानकारी और उन्हें सभी मार्गों में किस तरह से व्यवस्थाएं लगानी है इस पर भी मंथन चल रहा है। डीजीपी कैलाश मकवाना सिंहस्थ-2028 को लेकर अधिकारियों की बैठक कर चुके हैं। बैठक में उज्जैन के सभी आला अधिकारियों को बुलाया गया था। साल 2016 में हुए सिंहस्थ की व्यवस्था से भी अच्छी व्यवस्था 2028 कुम्भ में मिले उस पर भी मंथन किया गया। प्रयागराज कुंभ में तीन से चार बार आग लगी थी। उज्जैन में होने वाले कुंभ गर्मी के सीजन में होगा। जिसके चलते यहां भी इसके बचाव के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। उनकी व्यवस्थाओं की स्टडी की गई है। उन्होंने कंपोजिट व्यवस्था की गई थी। जैसे फायर स्टेशन, पुलिस के रुकने का स्थान और दूसरे अन्य व्यवस्थाओं को एक साथ मर्ज किया गया था। जिसमें कम्युनिकेशन बहुत इजी हो जाता है। तत्काल मौके पर पहुंचकर आपातकाल की घटना में एक साथ टीम रेस्क्यू शुरू कर सकती है। प्रयागराज कुम्भ में एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम भी बनाया था। जैसे भीड़ नियंत्रण के लिए पर स्क्वायर मीटर में कितने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं उसका अलर्ट भी मिलता रहा। उसके आधार पर कब श्रद्धालुओं को किधर निकलना किस रोड पर उनको डायवर्ट करना यह सब कुछ पता चला सका। इसके अलावा प्रयागराज में साइबर टीम को भी लगाया गया था। करीब 40 हजार के आसपास का बल उज्जैन कुम्भ में लगेगा। प्रयागराज कुंभ में 50 हजार का बल था। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई वैसे उन्हें भी बढ़ाना पड़ा था। उज्जैन में भी 14 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। अगर यहां भी भीड़ बड़ी तो पुलिस बल और बढ़ाया जा सकता है।


