AI से बेहतर हुई फ्रैक्चर के इलाज की थ्रीडी टेक्निक:आकार के आधार पर तैयार हो जाता है इम्प्लांट; फैक्चर को सही जगह बैठाने में कारगर

हड्‌डियां टूटने पर इंप्लांट करना और आसान हो गया है। अब आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (AI) के समावेश से पेशेंट के आकार के आधार पर इंप्लांट तैयार हो जाता है। इसमें पेशेंट को दर्द से तुरंत आराम मिल जाता है। लचक या अन्य कोई समस्या भी नहीं रहती। यह हड्‌डी के फैक्चर को सही जगह बैठाने में काफी कारगर है। यह बात डॉ. दिव्यांशु गोयल (अध्यक्ष, अर्थोपेडिक एसोसिएशन ऑफ इंदौर) ने चार दिवसीय नेशनल CCT-2025 कॉन्फ्रेंस (करंट कंसेप्ट इन ट्रॉमा) के समापन पर रविवार को कही। डॉ. गोयल ने बताया कि हड्डियां टूटने के बाद मरीज की उम्र, हाइट, आकार के अनुसार ऐसे इंप्लांट तैयार किए जाते हैं। ये सही आकार में तैयार होकर सही जगह फिट कर दिए जाते हैं। इससे जल्द सर्जरी होने के साथ पेशेंट को जल्दी आराम मिलने लगता है। इसमें कम समय में अच्छी एक्युरेसी के साथ सर्जरी होती है। इस प्रोसेस में मरीज के फैक्चर का सीटी स्कैन किया जाता है। फिर उसका 3-डी रिकंस्ट्रक्शन होता है यानी थ्री डायमेंशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार होता है। उसे थ्री डी प्रिंटर में डालते हैं उससे हड्‌डी के मॉडल का प्रिंट आउट आता है। इस प्रिंट आउट में हड्‌डी के टुकड़े अलग-अलग दिखाई देते हैं। उनके साइज के हिसाब से इंप्लांट की बनावट को बदल सकते हैं और फिर हड्‌डी के आकार के अनुसार मरीज में फिट किया जाता है। दरअसल हर मरीज के आकार के अनुसार उनका हिप ज्वाइंट (कूल्हा) अलग होगा। यानी उसके आकार के अनुसार इंप्लांट बनाए जाते हैं। इंप्लांट बॉडी में रहे तो भी मुसीबत नहीं
थ्री डी प्रोसेस और इंप्लांट के लिए दो दिन लगते हैं। इंप्लांट टाइटेनियम का बना होता है। यह एक प्रकार की धातु जैसी होती है। इसका किसी से रिएक्शन नहीं होता और न ही मैग्निक प्रापर्टी होती है। इंप्लांट के बाद एमआरआई भी कर सकते हैं। इस प्रोसेस में कोई बॉडी का पार्ट रिप्लेस नहीं होता बल्कि बॉडी की हड्‌डी के फैक्चर को सही जगह बैठाने के लिए होता है। अगर यह जिंदगीभर तक भी बॉडी में रहे तो कोई परेशानी नहीं होती।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक नॉर्मल कोई भी फैक्चर छह से आठ हफ्ते में ठीक होता है। फिर तीन से छह माह में उसके रिजल्ट्स पता चलते हैं कि मरीज आत्मनिर्भर होकर चल रहा है या नहीं। नॉर्मल सर्जरी की तुलना में इसका खर्च करीब 25 हजार रु. ज्यादा में होता है। नई टेक्नीक काफी बेहतर है। यह रहे मौजूद
कॉन्फ्रेंस में डॉ. अरविंद रावल, डॉ. हेमंत मंडोवरा, मुर्तजा रस्सीवाला, डॉ. वैभव गोयल, डॉ. मिलिंद शाह, डॉ. अक्षय जैन, डॉ. अंकित थोरा, डॉ. अंकुश अग्रवाल, डॉ. पुष्पवर्धन मंडलेचा, डॉ. वीरेंद्र चांदोरे, डॉ. विशाल यादव आदि शामिल हुए। इसमें कई एक्सपर्ट्स ने अपने प्रेजेंटेशन दिए।

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