छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवाद प्रभावित ग्राम सेण्ड्रा में सोमवार को एक नया सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैंप स्थापित किया गया। थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत स्थापित इस कैंप से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर माओवादी गतिविधियों पर नियंत्रण की उम्मीद है। डीआरजी, जिला बल और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की संयुक्त टीम ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस कैंप को स्थापित किया। प्रशासन का मानना है कि यह कदम सुरक्षा मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। वर्ष 2024 से अब तक जिले में कुल 36 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति बढ़ाने और स्थानीय लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है। यह नया कैंप भोपालपटनम् से फरसेगढ़ होते हुए सेण्ड्रा और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली को जोड़ने वाली कड़ी में अहम भूमिका निभाएगा। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली इंद्रावती नदी पर पुल निर्माण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे भविष्य में अंतर्राज्यीय आवागमन और बेहतर होगा। कैंप की स्थापना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), मोबाइल नेटवर्क, सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है। प्रशासन का दावा है कि इससे माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और स्थानीय ग्रामीणों में विश्वास का वातावरण मजबूत होगा। 2024 से बीजापुर में 918 माओवादियों ने किया सरेंडर पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक जिले में 918 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, 234 विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं, और 1181 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसी क्रम में, 1 मार्च को थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षा बलों ने दो अवैध माओवादी स्मारकों को ध्वस्त किया। पुलिस ने बताया कि माओवादी प्रभाव को समाप्त करने और आम नागरिकों में विश्वास बहाली के लिए यह अभियान जारी रहेगा।


