MP से एक और चीता आया राजस्थान:15 दिन से घूम रहे चीते का है छोटा भाई; मूवमेंट पर नजर रख रही वन विभाग की टीम

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक और चीता राजस्थान के बारां जिले में आ गया है। चीता केपी-3 सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे रामगढ़ वन क्षेत्र में पहुंचा। वहीं, करीब 15 दिन से चीता केपी-2 भी बारां जिले के वन क्षेत्रों में घूम रहा है। दोनों चीतों की कूनो और स्थानीय वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। डीएफओ विवेकानंद माणिकराव बडे ने बताया- चीता केपी-3 फिलहाल रामगढ़ क्रेटर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर घूम रहा है। उसकी लोकेशन को लगातार ट्रैक किया जा रहा है। केपी-3, चीता केपी-2 का छोटा भाई है। केपी-2 वर्तमान में बारां के मांगरोल वन क्षेत्र में मौजूद है। कूनो और बारां वन विभाग की संयुक्त टीमें जीपीएस कॉलर के माध्यम से इन चीतों की हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं। कूनो से 5वीं बार बारां पहुंचा चीता डीएफओ विवेकानंद माणिकराव बडे ने बताया कि यह 5वीं बार है जब कूनो नेशनल पार्क से कोई चीता विचरण करते हुए बारां जिले की सीमा में पहुंचा है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। भारत में ही जन्मा है केपी-3 वन विभाग के अनुसार, अफ्रीका से लाए गए चीता ओवान-आशा के 3 शावक हैं। इनमें केपी-1, केपी-2 और केपी-3 हैं। तीनों का जन्म भारत में ही हुआ है। इनमें से केपी-2 और केपी-3 का मूवमेंट राजस्थान में है। चीता जहां जाता है, उसके एक किमी एरिया में ट्रेकिंग की जाती है। साथ ही वह जिस दिशा में जाता है, उससे 50 से 100 मीटर दूरी पर रहकर मॉनिटरिंग की जाती है। बार-बार ट्रेंकुलाइज करना है जोखिम भरा पूर्व वन्यजीव प्रतिपालक रविंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बार-बार किसी चीते को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करना उसके शरीर और जीवन के लिए जोखिम भरा होता है। हर बार दी जाने वाली बेहोशी की दवा उसके हृदय गति और श्वसन प्रणाली सहित कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करती है, जिससे दिल की धड़कन अस्थिर हो सकती है और सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
चीता प्रोजेक्ट में शामिल हो चुका है राजस्थान, 7 जिले शामिल मध्य प्रदेश में चल रहे देश के पहले चीता प्रोजेक्ट में राजस्थान को शामिल किया जा चुका है। दोनों स्टेट के बीच 17 हजार वर्ग किलोमीटर का चीता कॉरिडोर बनेगा। इसमें चीता खुले में घूम सकेंगे। इस चीता प्रोजेक्ट में राजस्थान के 7 जिले शामिल होंगे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी एक्शन प्लान के अनुसार भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने कूनो-गांधीसागर लैंडस्केप का निर्धारण किया है। इसमें मध्य प्रदेश का 10,500 वर्ग किमी क्षेत्र और राजस्थान का 6500 वर्ग किमी क्षेत्र आएगा। प्रोजेक्ट से ये होगा फायदा कॉरिडोर में चीते कूनो नेशनल पार्क से राजस्थान के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से होते हुए गांधी सागर सेंचुरी तक मूव कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि इस कॉरिडोर में उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर का वन्य क्षेत्र में भी शामिल हो सकता है। … ये खबर भी पढ़ें… 1. MP से आए चीते ने राजस्थान में बनाया घर,VIDEO:खेतों में घूम रहा है, 3 दिन से नहीं किया शिकार, अधिकारी बोले- एरिया पसंद आया मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक चीता केपी-2 राजस्थान के बारां जिले में घूम रहा है। मांगरोल रेंज के वन क्षेत्र में मौजूद है। (पूरी खबर पढ़ें) 2. हिंडौन सिटी के आबादी क्षेत्र में घुसा लेपर्ड,VIDEO:छत पर खड़े युवक ने देखा, रेस्क्यू में जुटी वन विभाग की टीम करौली जिले के हिंडौन सिटी में आबादी क्षेत्र में लेपर्ड घुस गया। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। (पूरी खबर पढ़ें)

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