भीलवाड़ा में पूजे गए सोने के प्रहलाद, चांदी की होलिका:125 स्थानों पर होलिका दहन, 11 हजार कंडो और कपूर से वैदिक होली

भीलवाड़ा में होलिका दहन को लेकर शहर सहित जिलेभर में उत्साह का माहौल है। इस बार करीब 125 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जा रहा है।मोहल्लों और चौराहों पर होलिका सजाकर इनका दहन शाम को शुभ से मुहूर्त में विधि-विधान के साथ किया जा रहा है । शहर के हरनी महादेव क्षेत्र में चांदी की होलिका और सोने के प्रहलाद की बैंड-बाजे के साथ सवारी निकाली गई। 11 हजार कंडों से वैदिक होली अग्रवाल उत्सव भवन में इस बार 11 हजार गाय के गोबर से बने कंडों और कपूर के साथ वैदिक विधि से होलिका दहन किया गया। आयोजकों का दावा है कि इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। कई स्थानों पर सामाजिक बुराइयों के प्रतीकात्मक दहन भी किया गया। शमशान में चिता की राख से होली पंचमुखी मोक्षधाम में अनूठी परंपरा के तहत चिता की राख से शमशान होली खेली जा रही है। इस दौरान भेरुजी की सवारी निकाली जा रही है और भक्त भक्ति गीतों के साथ चिता की राख से होली खेल रहे हैं। हरनी में चांदी की होलिका, सोने के प्रहलाद की पूजा शहर के निकटवर्ती हरनी महादेव क्षेत्र में होलिका दहन नहीं हुआ। यहां चांदी की होलिका और सोने के प्रहलाद की बैंड-बाजे के साथ सवारी निकालकर गांव के चौराहे पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। आज दहन, कल धुलंडी बालाजी मार्केट स्थित पेंच के बालाजी मंदिर के पुजारी पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी सोमवार 2 मार्च को शाम 6:36 से रात 9 बजे तक प्रदोष काल में किया गया। चंद्रग्रहण से रंगों पर असर नहीं मंगलवार 3 मार्च को पूर्णिमा और अल्पकालिक चंद्रग्रहण रहेगा, जो शाम 6:45 से 6:47 तक केवल 2 मिनट का होगा। हालांकि सूतक सुबह 9:45 बजे से लग जाएगा। इस दौरान मंदिरों में दर्शन और प्रतिमा स्पर्श वर्जित रहेगा, लेकिन विद्वानों के अनुसार धुलंडी के रंग खेलने पर चंद्रग्रहण और सूतक का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। जिलेभर में होली पर्व को लेकर धार्मिक उत्साह और पारंपरिक आस्थाएं चरम पर हैं।

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