जंगली हाथी का आंतक:रांची में जंगली हाथी ने युवक को कुचला; मौत, एक महिला घायल

रातू के चितरकोटा बड़का टोली में सोमवार सुबह करीब 10 बजे जंगली हाथी के हमले में सुबोध खलखो (35) की मौत हो गई। वह मटर के खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान हाथी खेत में घुस आया और उन्हें कुचल दिया। सुबोध खलखो के साथ रौशन खलखो भी थे। हाथी को देखते ही वह भागने लगे, इस दौरान गिर पड़े। उनका पैर टूट गया है। घटना के बाद गांव में दहशत है। वहीं, दोपहर में रातू के ही लहना गांव में मालती देवी को हाथी ने कुचलकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। वह बेहोश हो गईं। हाथी कई घंटे तक पास में खड़ा रहा, इसलिए कोई मदद नहीं कर सका। बाद में ग्रामीणों ने उन्हें बेलांगी स्थित मादी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेस्क्यू टीम मूकदर्शक बनी रही। लहना गांव के युवक नितिन उरांव ने ड्रोन कैमरे से महिला और हाथी की दूरी ट्रेस की। जब पता चला कि हाथी कुछ दूर है, तब ग्रामीणों ने हिम्मत कर महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। विभाग बनाएगा कंपोजिट प्लान: डीएफओ डीएफओ श्रीकांत वर्मा ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग एक समग्र (कंपोजिट) योजना तैयार कर रहा है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। योजना के तहत आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित दल, पर्याप्त बल और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य जून-जुलाई तक इस योजना को लागू करने का है। जलस्रोतों की कमी से नदी और हटिया डैम की ओर आकर्षित होते हैं हाथी रातू और आसपास के इलाकों में जंगली हाथियों की आवाजाही होती रही है। जलस्रोतों की कमी के कारण हाथी आबादी की ओर रुख कर लेते हैं। इलाके की नदी और हटिया डैम जैसे जलस्रोत उन्हें आकर्षित करते हैं। कई बार वे कोटा वन क्षेत्र से भटककर रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। वन विभाग ने आपात स्थिति से निपटने के लिए दो क्विक रिस्पांस टीम गठित करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें प्रशिक्षित कर्मी, ट्रैंक्विलाइजर गन और हाथियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए विशेष वाहन उपलब्ध कराने की योजना है। हाथी को वन क्षेत्र में वापस भेज दिया गया है। खूंटी: कुएं में गिरा हाथी, दो घंटे में रेस्क्यू खूंटी | सोमवार को दोपहर 12:15 बजे अनिगड़ा गांव में एक जंगली हाथी कुएं में गिर गया। सूचना मिलने पर वन विभाग और प्रशासनिक टीम पहुंची। जेसीबी मशीन की मदद से कुएं के एक हिस्से की खुदाई शुरू कराई, ताकि हाथी को बाहर निकलने का रास्ता मिल सके। कुआं अधिक गहरा नहीं था। दोपहर 1:40 बजे खुदाई पूरी होते ही हाथी खुद बाहर निकल आया। इसके बाद वह खूंटी-चाईबासा मुख्य मार्ग पार कर पोकला की ओर जंगल क्षेत्र में चला गया। रात तक वह उसी इलाके में था

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