बीएसएल का विस्तारीकरण शुरू, 20 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे, रोजगार के रास्ते खुलेंगे

बीएसएल के विस्तारीकरण के लिए लगभग 20,000 करोड़ रुपए का निवेश होने जा रहा है। इससे रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक प्रगति के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण से संबंधित कई टेंडर निकल भी चुके और कई निकलने वाले हैं। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि विस्थापित युवाओं के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर सृजित होंगे। यह निवेश पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व विकास का आधार बन सकता है। इस वित्तीय वर्ष के पहले के 9 महीनों में प्लांट का वित्तीय प्रदर्शन भी उतना बेहतर नहीं रहा है, हालांकि हाल के महीनों में इसने वापस रफ्तार पकड़ी है। पिछले अप्रैल में लाठी चार्ज में प्रेम महतो की मौत के बाद हुआ था बड़ा आंदोलन गौरतलब है कि बीएसएल के विस्तारीकरण का प्रस्ताव करीब 2 साल पहले दिया गया है। पिछले साल नौकरी व अन्य मांगों को लेकर विस्थापितों के आंदोलन के दौरान लाठी चार्ज में एक युवक प्रेम महतो की मौत हो गई थी। इसके बाद आंदोलन इतना उग्र हुआ कि केंद्र सरकार ने प्लांट विस्तारीकरण के प्रस्ताव को विचाराधीन छोड़ दिया था। अब फिर विस्थापित संगठनों ने नौकरी व मुआवजा की मांग को लेकर 6 मार्च से फिर आंदोलन की घोषणा की है। विस्थापितों की मांगों में प्रेम महतो के परिजन को स्थाई नौकरी व मूर्ति लगाने के लिए जमीन आवंटित करने सहित अप्रेंटिस किए सभी युवकों को नौकरी और जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें मुआवजा व नौकरी आदि शामिल हैं। इधर, बीएसएल प्रबंधन ने कहा है कि कुछ मांगें पूरी हुई है कुछ पर विचार हो रहा है। संवाद, सहयोग और आपसी समझ से समाधान निकलेगा : बीएसएल बीएसएल प्रबंधन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और रचनात्मक विरोध सभी का अधिकार है। लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि विरोध का स्वरूप ऐसा हो, जिससे औद्योगिक माहौल, निवेश और रोजगार प्रभावित न हो। संवाद, सहयोग और आपसी समझ ही स्थाई समाधान का मार्ग है, टकराव नहीं। बीएसएल प्रबंधन का कहना है कि क्षेत्र की जनता खासकर विस्थापित समूहों और युवाओं के कई मुद्दों पर सकारात्मक पहल करते हुए उनके कल्याण के लिए कई कदम जैसे अप्रेंटिस युवाओं को संवेदकों द्वारा संयंत्र के कार्य में प्राथमिकता में नियोजन उपलब्ध कराना, विस्थापित ठेकेदारों को वरीयता के आधार पर कार्य उपलब्ध कराना आदि कदम उठाए हैं। आंदोलनों से प्रबंधन को डर, पिछले साल आंदोलन से रुक गया था विस्तारीकरण का प्रस्ताव

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *