चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही लग जाता है, इस समय मंदिरों में प्रवेश, देवी-देवताओं का दर्शन पूजन और भोग लगाना वर्जित…

भास्कर न्यूज | पत्थलगड़ा फाल्गुन पूर्णिमा में मंगलवार को चंद्र ग्रहण लग रहा है। करीब 122 साल बाद होली पर इस वर्ष चंद्र ग्रहण का संयोग बना है। जन्मकुंडली, वास्तु व कर्मकाण्ड परामर्श के विशेषज्ञ आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय ने बताया कि यह ग्रहण भारत में दिखेगा। हजारीबाग, चतरा, रांची, कोडरमा, गिरिडीह व अन्य क्षेत्रों में यह चंद्र ग्रहण शाम 6 बजे चंद्रोदय के समय दिखेगा। यहां यह ग्रहण 48 मिनट का होगा। उन्होंने बताया कि यहां ग्रस्तोदित खण्डचंद्र चंद्र ग्रहण दिखेगा। भारत के अलावा यह चंद्रग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया महाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक, पेसपिक, अंटार्कटिका व अन्य देशों में भी दृश्य होगा। विदेश की धरती पर यह चंद्र ग्रहण दोपहर के 3:02 से ही दिखाई देगा। लेकिन भारत में यह ग्रहण शाम के 6:00 बजे चंद्रोदय के साथ दिखेगा। क्योंकि यहां चंद्रोदय शाम 6:00 बजे हो रहा है। इसलिए यहां ग्रहण का दृश्य 6:00 बजे से ही दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पूर्व अर्थात प्रातः 9:00 बजे से शुरू होगा। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे। चूंकि सूतक काल में मंदिरों में प्रवेश, देवी-देवताओं का दर्शन पूजन, प्रतिमाओं का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित माना गया है। सूतक काल और ग्रहण काल के दरमियान उत्सव मनाने या अन्य शुभ कार्य करने की भी मनाही होती है। भारत में इस ग्रहण की अवधि 48 मिनट होगा। फाल्गुन पूर्णिमा पर सदियों बाद लग रहे चंद्रग्रहण को लेकर लोगों में जहां उत्सुकता दिख रही है वहीं इस ग्रहण के समय बन रहे ग्रह-नक्षत्रों के कई उलटफेर योग के कारण परेशानियों के कई सबब भी दिख रहें हैं। रंगों का पवित्र त्यौहार होली के मौके पर लग रहा है यह चंद्र ग्रहण कई राशि के जातकों के लिए शुभ है तो वहीं कई राशि के जातकों के लिए अशुभ भी प्रतीत हो रहा है। चंद्र ग्रहण और इसके सूतक काल में कुछ खास गलतियां करने से बचना चाहिए। इसमें भगवान की पूजा-पाठ वर्जित होती है। ग्रहण या सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण या सूतक काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। ग्रहण काल में भोजन करने या सोने की भी मनाही होती है। चंद्र ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। इसमें काटने, छीलने या सिलने का काम भी नहीं करना चाहिए। इसमें नुकीले या तेजधार वाले औजारों के इस्तेमाल की भी मनाही होती है। आचार्य ने बताया कि यह ग्रहण सिंह राशि पर लग रहा है। ऐसे में सिंह राशि समेत अन्य राशि के जातकों को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। बताते चलें कि इससे पूर्व फाल्गुन अमावस्या को सूर्य ग्रहण लगा था। हालांकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था। लेकिन सूर्य ग्रहण से कई देश प्रभावित हुए थे। शास्त्रों के अनुसार एक महीने में जब दो-दो ग्रहण के योग बनते हैं तब तूफान, भूकंप, मानवीय भूल से बड़ी संख्या में जनहानि होने के योग बनते हैं। एक ही महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं तो सेनाओं की हलचल बढ़ती है। सरकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा आने के योग रहते हैं। चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। ऐसे इस नक्षत्र और राशि में जन्में व्यक्तियों को कष्टप्रद रहेगा। मंगलवार दिन को ग्रहण लगने से जन-धन की हानि तथा धातु व रस पदार्थों में तेजी भी ला सकता है। इसके साथ साथ ही लूटपाट, चोरी, डकैती, अग्नि कांड, प्रदर्शन आदि जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। ग्रीष्म और आगामी वर्षा ऋतु में फसलों में रोग का प्रकोप देखने को मिल सकता है। देश की राजनीति में काफी उथल-पुथल की स्थिति बनती दिख रही है।

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