लुधियाना। गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी गडवासु ने पशु-चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सिटी की डायलिसिस इकाई में कुत्तों में अंतरालिक हेमोडायलिसिस तकनीक पर पांच दिवसीय भारत-कोरिया उन्नत व्यवहारिक प्रशिक्षण-सह-कार्यशा ला का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में दक्षिण कोरिया से सात पशु-चिकित्सक विशेष रूप से लुधियाना पहुंचे और उन्होंने उन्नत नैदानिक डायलिसिस तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह पहल अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मरीजों पर लाइव प्रदर्शन दिखाया गया। वास्तविक नैदानिक मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई और डायलिसिस की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही संवादात्मक वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें गुर्दा रोग, गुर्दा प्रतिस्थापन उपचार और अनुप्रयुक्त वृक्क-विज्ञान से संबंधित विषयों पर संरचित जानकारी साझा की गई। यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने कहा कि इस कार्यशाला ने डायलिसिस इकाई की टीम की उत्कृष्ट नैदानिक विशेषज्ञता, तकनीकी दक्षता और शैक्षणिक नेतृत्व को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि भारत अब उन्नत पशु-चिकित्सा प्रशिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभा रहा है। पशु चिकित्सा कॉलेज के डीन डॉ. स्वरण सिंह रंधावा ने बताया कि यह कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा समर्थित अनुभवात्मक अधिगम परियोजना के तहत आयोजित की गई। क्लीनिक निदेशक डॉ. जे. मोहिंदरू ने इसे नैदानिक मानकों को नई ऊंचाई देने वाला कदम बताया। डायलिसिस इकाई के प्रभारी और प्रशिक्षण निदेशक डॉ. रंधीर सिंह ने पशु चिकित्सा क्षेत्र में गुर्दा प्रतिस्थापन उपचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्य में उन्हें डॉ. राज सुखबीर सिंह, डॉ. गुरप्रीत सिंह, डॉ. जसनीत सिंह और डॉ. सचिन का सहयोग मिला। यह कार्यशाला तकनीकी उत्कृष्टता का उदाहरण बनने के साथ-साथ भारत और दक्षिण कोरिया के बीच शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम पहल साबित हुई।


