छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में मंडई मेले की सोमवार से शुरुआत हुई। 700 साल पुराने परंपरा के इस मेले को कोंडागांव मंडई के नाम से भी जाना जाता है। यह मेला फागुन पूर्णिमा के पहले मंगलवार को आयोजित किया जाता है। मेले की शुरुआत में गांव के प्रमुख पटेल और कोटवार एकत्रित होकर देवी-देवताओं को आमंत्रित करते हैं। अगले मंगलवार को देवी-देवताओं का आगमन होता है। सभी देवी-देवता ग्राम देवी के गुड़ी मंदिर में एकत्रित होते हैं। इसके बाद मेला परिसर की परिक्रमा की जाती है। बस्तर राजवंश से जुड़ी परंपरा बस्तर राजवंश से जुड़ी एक खास परंपरा भी इस मेले में निभाई जाती है। राजा पुरूषोत्तम देव के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार को सम्मान के साथ परघा कर मेले में लाया जाता है। पूरे विधि-विधान से की जाती है पूजा मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। वे अपने देवी-देवताओं के साथ आते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। यह मेला स्थानीय आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। यहां आस्था और संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिलते हैं।


