भास्कर न्यूज | मालखरौदा शासकीय वेदराम कॉलेज मालखरौदा में “छत्तीसगढ़ में इकोटूरिज्म: संभावनाएं, चुनौतियां और आगे की राह” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार हुआ। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और राज्य की आर्थिक प्रगति में इकोटूरिज्म की भूमिका पर चर्चा हुई। इस दौरान शोध संक्षेपिका का विमोचन किया गया और छत्तीसगढ़ के इकोटूरिज्म पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. बीडी जांगड़े ने की। मुख्य वक्ता शासकीय कन्या स्नातकोत्तर कॉलेज बिलासपुर की भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. कावेरी दाबढ़कर ने कहा कि इकोटूरिज्म राज्य की हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ता है, होमस्टे को बढ़ावा मिलता है और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है। सेमिनार संयोजक डॉ. उमा नंदिनी जायसवाल ने प्लास्टिक मुक्ति, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय सहभागिता पर जोर दिया। सह-संयोजक आरके कुर्रे ने इकोटूरिज्म की अवधारणा स्पष्ट करते हुए जिम्मेदार पर्यटन अपनाने की अपील की। अन्य वक्ताओं डॉ. पीआर कठौतिया और डॉ. सीपी खूंटे ने भी विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। यह सेमिनार छत्तीसगढ़ में इकोटूरिज्म के सतत और संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।


