एजुकेशन रिपोर्टर | धनबाद धनबाद। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में सोमवार से हेरिटेज नेटवर्क एनुअल जनरल असेंबली 2026 की शुरुआत हुई। चार मार्च तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत एवं यूरोप के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, संस्थान प्रमुख और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं। आयोजन संस्थान के डीन (इंटरनेशनल रिलेशंस एंड एलुमनाई अफेयर्स) के नेतृत्व में किया जा रहा है। हेरिटेज नेटवर्क की अध्यक्ष प्रो. टेरेसा जिलिंस्का ने इसे नेटवर्क के लिए मील का पत्थर वर्ष बताते हुए कहा कि सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी शिक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर साझा प्रयास समय की आवश्यकता है। नेटवर्क के उपाध्यक्ष प्रो. विमल चंद्र श्रीवास्तव ने भारत-यूरोप सहयोग की बढ़ती संभावनाओं पर बल देते हुए बहु-संस्थागत साझेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने विनिर्माण, जलवायु परिवर्तन एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त प्रस्तावों और वित्तीय अवसरों पर भी प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता ग्वेनेल गिलर्मे ने टीआईएमई एसोसिएशन तथा डबल डिग्री कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए वैश्विक शैक्षणिक गतिशीलता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अगले दो दिनों में नेटवर्क की भावी रूपरेखा, प्रबंधन संबंधी निर्णय, पोस्टर प्रेजेंटेशन, द्विपक्षीय बैठकें, कैंपस भ्रमण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में प्रो. आलोक दास, प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता, प्रो. शिबायन सरकार, आशीष कुमार, मृत्युंजय शर्मा सहित अन्य मौजूद थे। आईआईटी (आईएसएम) के उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक महत्व का है तथा ज्ञान हस्तांतरण के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त मास्टर्स कार्यक्रमों को बढ़ावा देना आवश्यक है। डीन प्रो. राजीव उपाध्याय ने स्वागत भाषण देते हुए संस्थान की वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। प्रो. तन्मय मैती ने इसे भारत-यूरोप के बीच दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुखी साझेदारी का महत्वपूर्ण मंच बताया, जबकि डीन प्रो. रजनी सिंह ने संयुक्त शोध एवं अकादमिक आदान-प्रदान को मजबूती मिलने की बात कही। पहले दिन थीमैटिक कॉन्फ्रेंस और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिसमें सतत विकास, समावेशी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. सोमनाथ चट्टोपाध्याय ने किया।


