वृंदावन में उड़े रे गुलाल कह दो राधा रानी से… पर नाचे भक्त

अमृतसर | सोमवार को श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में होली मनाई गई। यहां होली उत्सव मनाने की परंपरा 100 साल से चली आ रही है। रंगों से सरोबार भक्त भक्ति के रंग में डूबे रहे। मंदिर कमेटी की ओर से वृंदावन और बरसाना से फूलों के सूखे रंग मंगवाए गए थे। पालकी यात्रा में श्री ठाकुर जी को विराजमान करके सभी भक्तों ने मिलकर गुलाल होली खेली। वृंदावन में उड़े रे गुलाल कह दो राधा रानी से… व अन्य भजनों पर भक्त दिनभर नाचते रहे। मंदिर से श्री ठाकुर जी की पालकी यात्रा के दौरान पंडितों की ओर से केसू के फूलों से तैयार रंग भक्तों पर डाला गया। एक सप्ताह पहले केसू के सूखे फूलों को भिगोकर चूना डाल दिया जाता है ताकि केसू के फूल अपना प्राकृतिक रंग छोड़ दे। 5 किलो फूलों से करीब 100 किलो पानी वाला रंग तैयार किया जाता है। इससे कोई साइड फेक्ट नहीं होता और भक्त श्री ठाकुर जी का प्रसाद समझकर होली का रंग डलवाते हैं।

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