हरियाणा का गैंगस्टर कौशल चौधरी और अमित डागर बरी:मोहाली में 2019 में हुए मर्डर केस में थे आरोपी, पुलिस सबूत नहीं जुटा पाई

मोहाली के खरड़ में सात साल पुराने इंद्रजीत सिंह मर्डर मामले में जिला अदालत ने हरियाणा के गैंगस्टर कौशल चौधरी, अमित डागर और गुरदेव सिंह निवासी जिला तरनतारन को सबूत के अभाव में बरी किया है। अदालत ने 44 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया: “आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने हत्या में कोई षड्यंत्र रचा या मुख्य आरोपियों से संपर्क में थे। कोई प्रत्यक्षदर्शी, मोटिव या फॉरेंसिक लिंक नहीं मिला।” जबकि नौ आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका है। ऐसे में युवक की हत्या किसने की, उसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खरड़ में मारी थी गोलियां, मौके पर ही हुई मौत यह मामला 8 नवंबर 2019 को खरड़ सिटी थाने में दर्ज हुआ था। इंदरजीत सिंह, जो कि फिरोजपुर का निवासी था और चंडीगढ़ में घूमने के लिए आया था। जैसे ही खरड़ दर्पण सिटी से घूमने निकले थे तो तभी सड़क पर पहले से ही सड़क किनारे खड़े दो युवकों ने हाथ देकर मोटरसाइकिल रुकवा ली। बाइक चला रहे रोहित व अजय को जब तक मामला कुछ समझ आता, तब तक दोनों के बीच बैठे इंदरजीत सिंह के सिर से सटाकर दोनों युवकों ने अपने रिवॉल्वर से गोलियां बरसा दीं। घटनास्थल के नजदीक ही अपराधियों की कार खड़ी थी, जिसमें कोई तीसरा व्यक्ति पहले ही ड्राइविंग सीट पर बैठा था। अपराधियों के कार में सवार होते ही कार तेजी से रंधावा रोड की ओर निकल गई। इसके बाद दोनों दोस्त एक राहगीर की कार में इंदरजीत को लेकर खरड़ अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से 15 खाली कारतूस (KF-7.65) बरामद हुए थे और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चेहरे व सिर पर कई गोली के घाव बताए गए थे। आरोपियों का हत्यााकांड से नहीं जुड़ पाया लिंक तीन आरोपियों का कोई लिंक नहीं जुड़ पाया
फैसले के अनुसार, इन तीनों को 2021 में जेल में बंद होने के दौरान गुप्त सूचना के आधार पर नामजद किया गया था। गुरदेव सिंह फरीदकोट जेल, जबकि अमित और कौशल दिल्ली सेंट्रल जेल में थे। उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया, लेकिन कोई खुलासा बयान, कोई बरामदगी या कॉल डिटेल्स जैसा कोई इलेक्ट्रॉनिक सबूत नहीं पेश किया गया जो उन्हें मुख्य हत्यारों या पीड़ित से जोड़ता हो। मृतक के भाई ने ट्रायल में बयान बदला शिकायतकर्ता बलवीर सिंह (पीड़ित के भाई) ने ट्रायल के दौरान अपना बयान बदल दिया और कहा कि उन्हें इन आरोपियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पहले नौ सह-आरोपियों (रोहित सेठी, अजय कुमार उर्फ कपा, आशीष चोपड़ा, मेजर सिंह उर्फ बाबा आदि) को दिसंबर 2022 में ही बरी किया जा चुका था। आरोपियों को सावधानी के तौर पर 20,000 रुपये की जमानत बांड भरने को कहा गया है। यह मामला लंबे समय से चल रहा था।

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