जालंधर | प्राचीन मंदिर नौहरियां गुड़ मंडी में बुधिया और मरोदिया परिवार की ओर से होलिका दहन किया गया। उपलों की माला व अन्य सामग्री पूजन के लिए रखी गई। विद्वानों ने बताया कि होलिका दहन के बाद राख घर में रखने से खुशहाली और व्यापार में भी लाभ रहता है। होली हिंदू समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और होलिका दहन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंग-गुलाल से होली खेली जाती है। इसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि भी कहा जाता है। होलिका दहन की तैयारी त्योहार से 40 दिन पहले शुरू हो जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को अग्नि जलाई जाती है। दूसरे दिन सुबह नहाने से पहले इस अग्नि की राख को अपने शरीर लगाते हैं, फिर स्नान करते हैं। यहां महंत डॉ. राजकुमार शर्मा, मंजू शर्मा, तेजस, कृष्णा, हेमंत शर्मा व अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे। चरणजीतपुरा में होलिका दहन करते हुए श्रद्धालु।


