धौलपुर में रंगों का पर्व होली पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था के साथ धूमधाम से मनाया गया। बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह पर्व शुभ मुहूर्त में विधिवत होलिका दहन के साथ श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ।
धौलपुर जिले के ज्योतिषों के अनुसार, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:36 बजे से रात्रि 8:52 बजे तक निर्धारित था। हालांकि, नगर के विभिन्न गली-मोहल्लों में श्रद्धालुओं ने अपनी सुविधा और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग समय पर होलिका दहन किया। होलिका दहन के दौरान चंग की थाप पर पारंपरिक होली गीत गाती टोलियां और मंगल गीत गाती महिलाओं के समूह आकर्षण का केंद्र रहे। पूरे शहर में भक्ति, उल्लास और लोक संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर सदियों पुरानी परंपराओं का भी निर्वहन किया गया। होलिका की अग्नि में नए धान यानी गेहूं की बालियां सेंककर खाने की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि ऐसा करने से सालभर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल का आशीर्वाद मिलता है।
इसके अतिरिक्त, जलती होली से ‘बड़ खुल्या’ (गोबर के उपले) घर ले जाने की परंपरा भी निभाई गई। लोगों का विश्वास है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-शांति बनी रहती है। पुराने समय में माचिस के अभाव में चूल्हे की अग्नि प्रज्वलित रखने के लिए भी होली की पवित्र अग्नि घर ले जाई जाती थी। नगर के प्रमुख चौराहों और मोहल्लों में होलिका दहन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन की ओर से भी शांति व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।


