पुष्टिमार्गीय शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री मथुराधीश प्रभु मंदिर में 3 मार्च को होली महोत्सव के अवसर पर दर्शन व्यवस्था में विशेष परिवर्तन रहेगा। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, पुष्टिमार्गीय परंपरा और ग्रहण के सूतक काल के कारण इस दिन मंगला, ग्वाल, राजभोग, भोग आरती और शयन के दर्शन भक्तों के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। श्रद्धालु डोल (होली) के चौथे भोग के दर्शन मंगलवार को सुबह 10 बजे से निश्चित समय तक कर सकेंगे। इसके बाद दोपहर 3.20 बजे से शाम 6.47 बजे तक ग्रहण के विशेष दर्शनों के लिए पट खुले रहेंगे। शाम 6.47 बजे के बाद मंदिर में अन्य कोई दर्शन नहीं होंगे। प्रथम पीठ युवराज मिलन बावा ने बताया कि पुष्टिमार्ग (शुद्धाद्वैत दर्शन) में होली महोत्सव 40 दिनों का एक विस्तृत और भावपूर्ण ‘रस उत्सव’ है। श्री मथुराधीश मंदिर पर इसे अत्यंत भव्यता और भक्ति के साथ मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है। इसी दिन मंदिर में ‘गुलाल’ का खेल शुरू होता है और चालीस दिन त कउत्सव चलता है। यह वसंत के आगमन और ठाकुर जी के आनंदमयी स्वरूप का प्रतीक है। डोल महोत्सव के तहत ठाकुर जी को पालने में झुलाया जाएगा। प्रभु को होली के विशेष पकवान फगवा का भोग लगाया जाएगा। भक्त सखा या ‘गोपी’ भाव से अपने आराध्य के साथ होली खेलेंगे। मंदिर में इस दौरान राजसी ठाट-बाट और विशेष श्रृंगार के दर्शन होंगे। ग्रहण या सूतक जैसी खगोलीय घटनाओं के दौरान, सेवा प्रणाली को शास्त्रों के अनुसार गोपनीय कर दिया जाता है, ताकि प्रभु की मर्यादा बनी रहे। बता दें कि मंदिर में भक्तों ठाकुर जी के चार भोग के दर्शन होते हैं। मंगलवार को एक ही भोग के दर्शन होंगे।


